: अनजाना रास्ता
पहाड़ों की घुमावदार सड़कों पर आर्यन की पुरानी एसयूवी धीरे-धीरे रेंग रही थी। आर्यन एक पेशेवर फोटोग्राफर था, जिसे दुनिया के सबसे डरावने और वीरान स्थानों की तस्वीरें खींचने का जुनून था। उसकी अगली मंजिल थी—कालपुर। एक ऐसा गाँव, जो सरकारी नक्शों से मिट चुका था और जिसके बारे में कहा जाता था कि वहाँ का सूरज कभी पूरी तरह नहीं उगता।
जैसे-जैसे वह ऊंचाई पर चढ़ रहा था, देवदार के घने पेड़ों ने रास्ता घेर लिया। अचानक, कार के इंजन ने दम तोड़ दिया। आर्यन ने बोनट खोलकर देखा, तो सब कुछ ठीक था, लेकिन बैटरी पूरी तरह ड्रेन हो चुकी थी। तभी उसने देखा कि सड़क के किनारे एक छोटी सी लड़की खड़ी थी। उसने फटी हुई सफेद फ्रॉक पहनी थी और उसके हाथ में एक पुराना, बिना सिर वाला खिलौना था।
"बेटा, यहाँ पास में कोई बस्ती है?" आर्यन ने पूछा।
लड़की ने अपनी उंगली से एक संकरी पगडंडी की ओर इशारा किया और बिना कुछ बोले घने कोहरे में ओझल हो गई। आर्यन के पास और कोई चारा नहीं था, उसने अपना कैमरा बैग उठाया और उस पगडंडी पर चल दिया।
अध्याय 2: कालपुर की पहली झलक
करीब आधे घंटे की पैदल यात्रा के बाद, कोहरा थोड़ा छंटा और आर्यन के सामने एक वीरान बस्ती उभर आई। पत्थर के बने घर टूटे-फूटे थे, लेकिन सबसे अजीब बात यह थी कि हर घर के दरवाजे पर काले रंग से एक बड़ा सा क्रॉस (X) बना हुआ था।
गाँव के बीचों-बीच एक पुरानी 'डाक बंगला' जैसी इमारत थी। आर्यन ने सोचा कि रात बिताने के लिए यह सबसे सुरक्षित जगह होगी। जैसे ही उसने लकड़ी के भारी दरवाजे को धक्का दिया, अंदर से एक ठंडी हवा का झोंका आया, जिसमें मिट्टी और किसी पुराने इत्र की महक थी।
अंदर एक बूढ़ा चौकीदार बैठा था, जिसकी एक आँख पूरी तरह सफेद थी। उसने आर्यन को देखा और अपनी सूखी आवाज़ में बोला, "अतिथि... यहाँ रात को कोई नहीं रुकता। सूरज डूबने से पहले चले जाओ।"
आर्यन ने मुस्कुराते हुए कुछ पैसे उसकी ओर बढ़ाए और कहा, "बस एक रात की बात है बाबा, सुबह होते ही निकल जाऊँगा।"
बूढ़े ने पैसे लिए और बिना कुछ कहे एक चाबी आर्यन के हाथ में थमा दी। "कमरा नंबर 13... और याद रखना, रात को चाहे कोई भी पुकारे, खिड़की मत खोलना।"
अध्याय 3: खौफनाक सन्नाटा
रात के 10 बज रहे थे। आर्यन अपने कमरे में बैठा अपनी तस्वीरों को लैपटॉप पर देख रहा था। अचानक उसे महसूस हुआ कि कमरे का तापमान तेज़ी से गिर रहा है। उसने देखा कि उसकी सांसें धुएं की तरह जम रही थीं।
तभी बाहर गलियारे में उसे भारी जूतों की आवाज़ सुनाई दी। "खट... खट... खट..."
आवाज़ उसके कमरे के ठीक सामने आकर रुक गई। आर्यन ने सोचा शायद चौकीदार होगा। उसने दरवाज़ा खोला, लेकिन बाहर कोई नहीं था। पूरा गलियारा अंधेरे में डूबा था। जब वह वापस पलटने लगा, तो उसकी नज़र फर्श पर पड़ी। वहाँ गीले मिट्टी के पैरों के निशान थे, जो सीधे उसके कमरे के अंदर जा रहे थे और फिर अचानक दीवार के पास गायब हो रहे थे।
आर्यन का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। उसने अपना कैमरा उठाया और नाइट-मोड में एक तस्वीर खींची। जब उसने एलसीडी स्क्रीन पर फोटो देखी, तो उसके हाथ कांपने लगे। तस्वीर में, उसके ठीक पीछे एक आदमी खड़ा था, जिसका चेहरा बुरी तरह झुलसा हुआ था और उसकी गर्दन एक तरफ लटकी हुई थी।
अध्याय 4: अतीत की खूनी दास्तान
दहशत में आर्यन नीचे भागा और चौकीदार के कमरे का दरवाज़ा खटखटाया। बूढ़ा वहीं बैठा था, जैसे वह आर्यन का ही इंतज़ार कर रहा हो। आर्यन ने उसे तस्वीर दिखाई।
बूढ़े ने गहरी सांस ली और बताया, "यह माधव है। 40 साल पहले इस गाँव का पोस्टमास्टर। गाँव में एक महामारी फैली थी, लोगों का मानना था कि माधव ने ही कुएं में ज़हर मिलाया है। गुस्से में गाँव वालों ने उसे इसी डाक बंगले के कमरे नंबर 13 में बंद करके ज़िंदा जला दिया था। तब से, कालपुर का हर निवासी धीरे-धीरे मर गया या भाग गया। अब यहाँ सिर्फ वो आत्माएं रहती हैं जो चैन की तलाश में हैं।"
बूढ़े की बात अभी खत्म भी नहीं हुई थी कि अचानक डाक बंगले की सभी खिड़कियां एक साथ ज़ोर से बंद होने और खुलने लगीं। दीवार पर टंगी पुरानी घड़ियाँ पीछे की तरफ चलने लगीं।
अध्याय 5: रूहों का तांडव
आर्यन ने अपनी कार की चाबी उठाई और बाहर की ओर भागा। लेकिन बाहर का नज़ारा और भी भयावह था। जो घर टूटे हुए थे, वे अब बिल्कुल नए दिख रहे थे। गलियों में धुंधली परछाइयां घूम रही थीं। बाज़ार लगा था, लेकिन वहाँ कोई शोर नहीं था। लोग बिना सिर के चल रहे थे, और बच्चे काले रंग की आंखों के साथ खेल रहे थे।
तभी उसे वही सफेद फ्रॉक वाली लड़की दिखी। वह अब मुस्कुरा रही थी, लेकिन उसकी मुस्कान कान से कान तक फटी हुई थी। "तुम हमारे साथ खेलोगे?" उसने पूछा। उसकी आवाज़ एक साथ हज़ारों रूहों की चीख जैसी लग रही थी।
आर्यन अपनी जान बचाकर जंगल की ओर भागा। उसे पीछे से हज़ारों कदमों की आहट सुनाई दे रही थी। वह गिरता-पड़ता अपनी कार तक पहुँचा। चमत्कारिक रूप से, कार का इंजन एक ही बार में स्टार्ट हो गया। उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा और पूरी रफ़्तार से गाड़ी भगा दी।
अध्याय 6: कभी न खत्म होने वाला खौफ
सुबह के 4 बजे आर्यन मुख्य राजमार्ग (Highway) पर पहुँचा। रोशनी देखकर उसने चैन की सांस ली। उसने सोचा कि यह सब एक बुरा सपना था। उसने अपना कैमरा बैग खोला ताकि वह माधव वाली तस्वीर देख सके।
लेकिन जैसे ही उसने कैमरा ऑन किया, उसका गला सूख गया। मेमोरी कार्ड में कोई तस्वीर नहीं थी। पूरा कार्ड खाली था। तभी उसने कार के रियर-व्यू मिरर (Rear-view mirror) में देखा। पिछली सीट पर वही बिना सिर वाला खिलौना रखा था जो उस लड़की के हाथ में था।
और सबसे डरावनी बात—उसकी कार की पिछली खिड़की पर धूल में छोटे बच्चों के हाथों के निशान थे और अंदर की तरफ से लिखा था: "जल्द मिलेंगे।"
आर्यन ने गाड़ी रोकी और पागलों की तरह बाहर निकला। जब उसने अपनी कार की नंबर प्लेट देखी, तो वह चीख पड़ा। नंबर प्लेट पर 'कालपुर' के डाक बंगले की मुहर लगी थी और तारीख लिखी थी—8 मार्च, 1986।
आर्यन आज भी ज़िंदा है, लेकिन वह कभी सो नहीं पाता। उसे आज भी बंद आँखों से वही सफेद फ्रॉक वाली लड़की और जलता हुआ माधव दिखाई देता है। लोग कहते हैं कि कालपुर से कोई वापस नहीं आता... और जो आता है, वह खुद भी एक 'परछाई' बन चुका होता है।
उपसंहार
कुछ जगहें इतिहास के पन्नों से इसलिए मिटा दी जाती हैं ताकि इंसान वहाँ न पहुँचे, लेकिन रूहें हमेशा रास्ता ढूंढ लेती हैं। कालपुर आज भी वहीं है, अगले मुसाफिर के इंतज़ार में