एकांश हैरानी से कहता है----
एकांश :- मेरा महल..?
वर्शाली कहती है:- हाँ एकांश जी। आप भूल गए के अपने कैसे मुझे उन दुष्ट मानवो से रक्षा किए थे बस
तभी से मेैं और ये महल आपका हो गया।
एकांश वर्षाली से पुछता है---
एकांश :- क्या...! वर्शाली क्या कहा तुमने। तुम भी मेरी हो गई हो।
वर्शाली :- आपको क्या सुनाई दिया एकांश जी। एकांश चुप हो जाता है और कहता है---
एकांश :- तुमने इतना कह दिया ये मेरे लिए बहुत है वर्षाली । पर मैं यहां चाह कर भी नहीं रुक सकता। क्योंकी तुम एक लड़की हो और मैं एक लड़का अगर किसी को इस बात का पता चला के हमलोग साथ में रात गुजारी है तो सब गलत नजर से देखेंगे और वर्शाली मुझे मेरी चिंता नहीं है तुम्हारी चिंता है। मैं नहीं चाहता के लोग तुम्हें गलत नजर से देखे।
वर्शाली बस एक प्यारी सी मुस्कान देती है। एकांश के मन में अब भी कई सावल थे पर ना चाहते हुए भी उसे अब अपने घर जाना था। क्योंकी एकांश को अब वर्शाली का साथ अच्छा लगने लगा था।
एकांश वर्शाली से कहता है----
एकांश :- अच्छा तो मैं चलता हु वर्शाली ।
एकांश के इतना कहते ही वर्शाली का चेहरे की मुस्कान चली जाती है। वर्शाली एकांश को बस देखे ही जा रही थी वर्शाली भी नहीं चाहती थी कि एकांश वहां से जाए।
वर्शाली एकांश को अपने पास हमेशा के लिए रखना चाहती थी। पर वर्शाली एकांश को रोक नहीं पा रही थी। वर्शाली के मन में एकांश के लिए बहुत प्यार था पर वर्शाली एकांश को बता नहीं पा रही थी।
एकांश की अच्छी ने वर्शाली को प्यार करने पर मजबूर कर दिया और वर्शाली ना चाहते हुए भी एकांश से प्यार कर बैठी थी।
वर्शाली यहां पर एकांश को मारकर अपनी बहन हर्शाली को बचाने के लिए आई थी । पर उस रात के बाद वर्शाली एकांश से प्यार कर बैठती है ।
तभी एकांश वर्शाली से कहता है----
एकांश :- मैं जाऊ वर्शाली ?
वर्शाली हां में अपना सर हिला देती है और एकांश वहां से जाने लगता है। तब वर्शाली एकांश से कहती है---
वर्शाली :- जरा रुकिए एकांश जी.....!
वर्शाली के पुकारने पर एकांश वही रुक जाता है। तब वर्शाली एकांश के पास जा कर कहती है---
वर्शाली :- आप अकेले ही चले जाएंगे एकांश जी..? अपने मित्र को यही छोड़ कर।
एकांश हल्की मुस्कान देता है और अपने माथे पर अपना हाथ रख कर कहता है---
एकांश :- अरे मैं तो भूल ही गया था। मैं अभी उसे उठा कर लता हूं।
तभी वर्शाली एकांश को मना करते हुए कहती हैं--
वर्शाली :- रुकिए एकांश जी वो आपके उठाने से नहीं उठेंगे।
एकांश :- पर क्यों वर्शाली ..?
वर्शाली :- क्युंकी मैं उन्हे यहां के बारे में सब भुला दिया हूं। ताकि आलोक को सिर्फ वर्शाली और ये झरना याद रहे।
एकांश :- क्या तुम मुझे भी सब भुला दोगी वर्शाली ..?
वर्शाली: - कभी नहीं एकांश जी केवल आपको ही ज्ञात होगा के मेैं एक परी हूँ ।
एकांश :- पर मैं ही क्यों वर्शाली ।
वर्शाली धीरे से कहती है-----
वर्शाली :- क्योंकी मैं आपसे प्रेम करती हूँ एकांश जी।
एकांश प्रेम सब्द सुनकर वर्शाली से पुछता है---
ओकांश :- प्रेम करती हो पर किससे।
वर्षाली बात को बदल कर कहती है---
वर्शाली :- प्रेम नहीं एकांश जी। पूर्ण कहा मैंने। मुझे
आप पर पूर्ण भरोसा है के आप इसे गुप्त रखोगे।
एकांश हां मे सर हिलाता है और एक हल्की मुस्कान देकर झट से वहाँ से गयाब हो जाती है और फिर तूरंत वहां पर आलोक को लेकर आ जाती है। जिसे देख कर एकांश हैरान रह जाता हैं और वर्शाली से पुछता है।
एकांश :- ये....ये....तुमने कैसे किया वर्शाली ..?
एकांश कुछ सौच कर फिर कहता है---
एकांश :- अच्छा तो उस रात को भी तुमने ऐसे ही मूझे मेरे कमरे में पँहूचा कर आ गई थी है ना और मैं यही सोच रहा था के एक लड़की मुझे मेरे घर तक कैसे पहूँचा सकतू है।
वर्षाली हंसती हुई कहती है----
वर्शाली :- आपको सायद ञात होगा एकांश जी के मेैं
एक परी हु और परियों के पास बहुत सारी शक्ति होती है।
एकांश अपना सर खुजाते हुए कहता है---
एकांश :- हां मैं भूल गया था।
तब वर्शाली कुछ फुसफाती है तो आलोक निंद से
जागने लगता है और एक उबासी लेकर कहता है
आलोक :- आ....हहह । यार मेैं यहाँ कब सो गया था ? पता नहीं मुझे कब निंद आ गई।
एकांश आलोक की बात से हैरान था। आलोक सच में
सब भूल चुका था।
एकांश वर्षाली की और हैरानी से देखता है। तब वर्शाली आलोक से कहती है----
वर्शाली :- जानते हो आलोक एकांश जी आपके कारण सूबह से यही पर हैं।
आलोक हैरानी से कहता है---!
आशोक :- क्या मेरे कारण..?
वर्शाली :- हां आलोक आपके कारण। एकांश जी कबसे आपको उठाने की कोसिस कर रहे हैं पर आप हो की घोर निंद्रा में यही सो रहे थे। एकांश जी क्या करते बेचारे..? आपको छोड़ कर तो नहीं जा सकते ना इसिलिये ये आपके उठने का प्रतीक्षा कर रहे थे।
आलोक पॉकेट से अपना मोबाइल निकाल कर टाइम देखता है और एकांश से कहता है---
आलोक :- सॉरी यार माफ करना पता नहीं मुझे कब और कैसै निंद आ गई। शायद इस जगह के कारण
क्योंकी यहां इतनी शांति और सुख का अनुभव हुआ के मैं उठा ही नहीं।
वर्शाली :- नहीं आलोक ऐसी कोई बात नहीं है।
एकांश और आलोक वहां से निकला जाता है। रास्ते में सुंदरवन पार करते करते एकांश बार बार आलोक की और देखता है और सोचता है के क्या सच में आलोक सब भूल गया है पर ऐसा कैसे हो सकता है। ये बात कन्फर्म करने के लिए एकांश आलोक से पुछता
है---
एकांश :- आलोक वो महल कितना शानदार था ना।
एकांश की बात सुनकर आलोक हैरान हो जाता है और
एकांश से पुछता है---
आलोक :- महल....! कोनसा महल...! तुम किस महल की बात कर रहे हो एकांश।
एकांश समझ जाता है के आलोक को महल के बारें में कुछ नहीं पता। वो सब भूल चुका था। एकांश बात को घुमाते हुए कहता हैं---
एकांश :- जहां पर तू पुरा दिन सो रहा था मेैं उस महल की बात कर रहा हूं। तू वहां पर ऐसे सोया था जैसे किसी महल के नरम गद्दे पे सोए हुए हो और उठने का नाम तक नहीं ले रहे थे।
इतना बोलकर एकांश जोर से हंसने लगता है। आलोक बिना कुछ बोले ही चलता रहता हैं। आलोक को पता था एकांश उसके मजे ले रह है । कुछ दैर में एकांश आलोक को उसकी हवेली पर छोड़कर अपने घर पँहुच जाता है। एकांश की बाइक की आवाज सुनकर वृंदा बहोत खुश हो जाती है।
तभी मीना की फोन पर सोनाली का फोन आता है। मीना फो़न को रिसिव करके कहती है---
मीरा :- हां सोनाली बहन बोलिये।
उधर से सोनाली की आवाज आती है---
सोनाली :- वो में बस ये पुछ थी की वृंदा आप लोगों को परेसान तो नहीं कर रही है ना?
मीरा :- अरे सोनाली बहन कैसी बात कर रही हो आप। अब आप वृंदा की चिंता छोड़ दिजिये वृंदा अब इसी घर में रहने वाली है।
मिरा की बात सुनकर सोनाली कहती है---
>" क्या कहा आपने..! क्या ये सच है।
मीरा खुशी से कहती है---
>" हाँ बहन ये बिलकुल सच है। मीरा को हमसब इस घर की बहू बनाना चाहते हैं।
इतना सुनकर सोनाली कहती है---
>" मीरा बहन आपने तो मेरी मन की बात कह डाली। में आपसे कल पार्टी में बात करने वाली थी पर हिम्मत
नहीं जूटा पाई।
मीरा कहती है---
>" अब आप शादी की तैयारी किजिये क्योंकी वृंदा को भी एकांश बहुत पसंद है और उसने खुद ये बात बतायी।
सोनाली खुश होती हैं और कहती हैं----
>" ये तो बहुत अच्छी बात है। पर बहन क्या एकांश को भी वृंदा पसंद है..?
To be continue....413