वे हंस पड़ीं। कुछ ही मिनटों में वेटर ने उनका आर्डर टेबल पर रख दिया—ठंडी, झागदार कॉफी और मसालेदार नाचोज।
रिया ने पहला नाचो उठाते हुए कहा, "अब बता, टेस्ट कैसा गया? प्रोफेसर मिश्रा की स्माइल के अलावा कुछ और खास?"
समीरा ने कोल्ड कॉफी का एक घूंट लिया और सोचा। "टेस्ट तो सही गया, खासकर आखिरी सवाल... मैंने जो लिखा, वो सच में दिल से निकला था।"
रिया ने सिर हिलाया। "हम्म, हाँ! वैसे भी, आजकल हर पॉलिसी लोगों की साइकोलॉजी को ध्यान में रखकर बनाई जाती है। सरकार भी जानती है कि सिर्फ नियम बनाने से कुछ नहीं होगा, लोगों को सही से मोटिवेट करना पड़ता है।"
समीरा ने मुस्कुराकर कहा, "बिल्कुल। मैंने जन-धन योजना और डिजिटल इंडिया का उदाहरण दिया था।"
रिया ने टेबल पर हल्की थपकी दी। "ओह, ग्रेट! फिर तो अच्छे मार्क्स पक्के!"
समीरा ने हल्की मुस्कान दी, लेकिन फिर उसकी नजर खिड़की के बाहर चली गई। रिया ने भांप लिया कि उसके दिमाग में कुछ और चल रहा है।
"क्या हुआ? कहीं तू फिर दानिश के बारे में तो नहीं सोच रही?" रिया ने चुटकी ली।
समीरा ने गहरी सांस ली। "पता नहीं... शायद।"
दानिश की उलझन
रिया ने झट से अपनी कोल्ड कॉफी उठाई। "देख, मैं पहले ही कह रही हूँ, तुझे ज़्यादा सोचने की जरूरत नहीं है। अगर दानिश तुझसे बात नहीं कर रहा, तो तू क्यों इतनी टेंशन ले रही है?"
समीरा ने धीरे से कहा, "ऐसा नहीं है कि वो बात नहीं कर रहा... बस,
रिया ने भौंहें चढ़ाईं। "मतलब?"
रिया ने गहरी सांस ली। "देख, कई बार लोग खुद भी कन्फ्यूज होते हैं।
समीरा ने हल्के से सिर हिलाया। "शायद तू सही कह रही है..."
पार्टी का असली मजा
इतने में लाइव म्यूजिक शुरू हो गया। एक ग्रुप गिटार के साथ बॉलीवुड के पुराने गाने गाने लगा। कैफे का माहौल और खुशनुमा हो गया।
रिया ने उत्साहित होकर कहा, "समीरा! हम कोई गाना रिक्वेस्ट करें?"
समीरा हंस पड़ी। "अरे नहीं, मुझे पब्लिक में ऐसे ध्यान में आना पसंद नहीं!"
"ओहो, कोई तुझे स्टेज पर थोड़ी बुला रहा है! बस रिक्वेस्ट कर रहे हैं!"
रिया ने वेटर को इशारा किया और "दिल चाहता है" गाने की फरमाइश कर दी।
गिटारिस्ट ने मुस्कुराते हुए कहा, "गुड चॉइस!" और गाने की धुन छेड़ दी।
समीरा और रिया दोनों मुस्कुराते हुए लय में झूमने लगीं।
रिया ने चुटकी ली, "देख, यही जिंदगी का असली मजा है! हर पल को जी, ज्यादा मत सोच।"
समीरा ने सिर हिलाया। "शायद तू सही कह रही है।"
अंतिम विचार
गाना खत्म होते ही कैफे तालियों की गूंज से भर गया। समीरा ने अपनी कोल्ड कॉफी का आखिरी घूंट लिया और सोचा—रिया सही कह रही थी। हर चीज़ के जवाब ढूंढने की कोशिश करना जरूरी नहीं, कुछ बातें वक्त के साथ खुद ही समझ आ जाती हैं।
"तो, अब अगली पार्टी कब?" रिया ने हंसते हुए पूछा।
समीरा ने मुस्कुराकर कहा, "जब प्रोफेसर मिश्रा मेरे जवाब पर सिर्फ स्माइल नहीं, बल्कि पूरे क्लास के सामने तारीफ कर दें!"
रिया हंस पड़ी। "डन! फिर अगली ट्रीट तेरी तरफ से!"
दोनों खिलखिलाते हुए कैफे से बाहर निकलीं, और समीरा के मन में अब हल्केपन का एहसास था—जैसे उसने अपनी उलझनों को कुछ देर के लिए किनारे रख दिया हो।
पार्टी के बाद – एक नई शुरुआत
कैफे "Brew & Bite" में बिताए गए खुशनुमा पलों के बाद, रिया और समीरा बाहर निकलीं। ठंडी हवा हल्के-हल्के बह रही थी, और सड़कों पर स्ट्रीट लाइट्स की पीली रोशनी फैली हुई थी। पार्टी का जोश अभी भी उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था।
"अब सीधा घर जा रही है, या कुछ देर और कैंपस में घूमेगी?" रिया ने हंसते हुए पूछा।
समीरा ने गहरी सांस ली। "नहीं यार, अब घर ही जाऊंगी। काफी देर हो गई है।"
रिया ने सिर हिलाया। "ठीक है, मैं भी निकलती हूँ। कल मिलते हैं!"
रिया अपनी स्कूटी की ओर बढ़ गई, जबकि समीरा पैदल ही अपने घर जाने के लिए सड़क की ओर बढ़ी। उसका घर ज्यादा दूर नहीं था, लेकिन रात के इस पहर सड़कों पर सन्नाटा था। हल्की ठंडक में उसने अपने हाथों को जैकेट की जेब में डाल लिया और धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी।
अचानक मुलाकात
जैसे ही समीरा गली के मोड़ पर पहुंची, एक चमचमाती काली कार उसके पास आकर रुकी। कार की खिड़की नीचे सरकी, और अंदर से एक जानी-पहचानी आवाज आई—
"समीरा?"
समीरा का दिल हल्का सा धड़क उठा। उसने नज़र घुमाई, तो कार के अंदर दानिश बैठा था। सफेद शर्ट के ऊपर हल्की जैकेट पहने, हमेशा की तरह कॉन्फिडेंट और हैंडसम लग रहा था।
"इतनी रात को अकेले जा रही हो?" दानिश ने पूछा, उसकी आंखों में हल्की चिंता झलक रही थी।
समीरा ने संयत आवाज में जवाब दिया, "हाँ, घर पास ही है। मैं चली जाऊंगी।"
दानिश ने हल्की मुस्कान दी। "अरे, छोड़ देता हूँ। बैठ जाओ।"
समीरा ने तुरंत मना कर दिया। "नहीं, कोई जरूरत नहीं। मैं चली जाऊंगी।"
दानिश ने भौंहें चढ़ाईं। "समीरा, ज़िद मत करो। इतनी रात को अकेले जाना ठीक नहीं है।"
"मैं रोज़ जाती हूँ ऐसे ही," समीरा ने हल्का सा ठंडे लहजे में कहा और आगे बढ़ने लगी।
लेकिन दानिश ने हार नहीं मानी। उसने कार का दरवाजा खोला, बाहर आया और उसके सामने खड़ा हो गया।
"कम ऑन, जिद छोड़ो और कार में बैठो," उसने गंभीरता से कहा।
समीरा ने उसे अनदेखा करने की कोशिश की, लेकिन तभी दानिश ने हल्की हंसी के साथ कहा, "अगर तुम खुद नहीं बैठोगी, तो मुझे जबरदस्ती करनी पड़ेगी।"
जबरदस्ती या परवाह?
समीरा ने आँखें तिरछी कीं। "तुम जबरदस्ती नहीं कर सकते!"
"ट्राय करके देखूँ?" दानिश की आँखों में शरारत थी, लेकिन साथ ही एक संजीदगी भी थी।
समीरा ने गहरी सांस ली, लेकिन इससे पहले कि वह कुछ कह पाती, दानिश ने उसके हाथ को हल्के से पकड़ा और बिना ज्यादा जोर दिए उसे कार की ओर ले जाने लगा।
"दानिश!" समीरा ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन उसकी पकड़ उतनी भी सख्त नहीं थी कि तकलीफ दे।
"देखो, मैं जबरदस्ती नहीं कर रहा, सिर्फ तुमसे कह रहा हूँ कि इस वक्त अकेले जाना सेफ नहीं है। अगर तुम्हें मुझ पर भरोसा है, तो बस कार में बैठो।"
समीरा कुछ पल तक उसकी आँखों में देखती रही। दानिश की आँखों में न कोई धौंस थी, न जबरदस्ती—सिर्फ फिक्र थी।
आखिरकार, समीरा ने हार मान ली। "ठीक है," उसने धीरे से कहा और कार में बैठ गई।
दानिश हल्की मुस्कान के साथ ड्राइवर की सीट पर आकर बैठ गया।