Tere Ishq me ho jaau Fannah - 5 in Hindi Love Stories by Sunita books and stories PDF | तेरे इश्क में हो जाऊं फना - 5

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तेरे इश्क में हो जाऊं फना - 5

शहर का सबसे महंगा होटल – एक खतरनाक रात 

तूफ़ान से पहले की शांति

होटल का माहौल अब पूरी तरह बदल चुका था। जहाँ कुछ देर पहले लोग हंसी-मजाक कर रहे थे, वहीं अब उनकी आँखों में अनजाना सा डर था। हर कोई जानता था कि कुछ बड़ा होने वाला है।

दानिश ने अपने गिलास को धीरे-से उठाया, एक आखिरी घूंट लिया और फिर उसे टेबल पर रख दिया। उसने अपने भाई कबीर की ओर देखा, जो अभी भी उत्साह से भरा था लेकिन उसके चेहरे पर हल्की बेचैनी थी।

"कबीर," दानिश ने धीरे से कहा, "आज की रात तुम्हारे लिए एक इम्तिहान होगी। अगर तुम इस दुनिया में आना चाहते हो, तो तुम्हें ये समझना होगा कि यहाँ जिंदा रहने के लिए सिर्फ हिम्मत नहीं, अक्ल भी चाहिए।"

कबीर ने सिर हिलाया। "मैं तैयार हूँ, भाई।"

दानिश हल्के से मुस्कुराया और फिर रिज़वान की ओर देखा।

"क्या खबर?"

रिज़वान ने जेब से अपना फोन निकाला, उस पर कुछ मैसेज देखे, फिर सिर उठाकर कहा, "बाहर तीन गाड़ियाँ खड़ी हैं। अंदर वाले आदमी से वे लगातार बात कर रहे थे। मेरे लोगों ने पार्किंग एरिया में गुपचुप तरीके से कुछ हथियार तैनात कर दिए हैं। लेकिन अभी तक उन्होंने कोई हरकत नहीं की है।"

"मतलब वो इंतज़ार कर रहे हैं," दानिश ने धीरे से कहा।

"किस चीज़ का?" कबीर ने पूछा।

"हमारी एक गलती का," दानिश ने ठंडे स्वर में कहा।

घात लगाकर बैठे शिकारी

होटल के बाहर तीन काली एसयूवी खड़ी थीं। उनके अंदर बैठे लोग घड़ी की सूइयों की तरह शांत थे, लेकिन उनकी आँखों में सिर्फ एक मकसद झलक रहा था— दानिश सानियाल का खात्मा।

इनमें से एक गाड़ी की पिछली सीट पर बैठा आदमी सबसे ज्यादा खतरनाक था। उसका नाम था रफीक मिर्जा— वही इंसान जिसने दानिश को मारने की साजिश रची थी। लेकिन दानिश ने पहले ही चाल चल दी थी।

रफीक ने अपने फोन पर आखिरी मैसेज पढ़ा:

"होटल लॉक कर दिया गया है। दानिश को भनक लग गई है। अब क्या करें?"

रफीक ने ठंडी हंसी हँसी।

"अब खेल शुरू होता है।"

उसने सामने बैठे आदमी की ओर इशारा किया।

"आदेश दे दो। होटल पर धावा बोलो।"

पहला वार

होटल के अंदर…

दानिश को एहसास हो गया था कि अब देर करना ठीक नहीं होगा। उसने अपने चारों ओर नजर दौड़ाई। रिज़वान, कबीर, और उसके बाकी लोग तैयार खड़े थे।

"हम अटैक का इंतजार नहीं करेंगे। हम खुद वार करेंगे।"

इतना कहते ही उसने एक छोटा-सा रिमोट कंट्रोल निकाला और बटन दबा दिया।

"बीप-बीप!"

होटल की लाइट्स अचानक बंद हो गईं।

अंधेरा।

हॉल में हलचल मच गई। लोगों की घबराई हुई फुसफुसाहट गूंजने लगी।

"ये क्या हो रहा है?" कबीर ने हैरानी से पूछा।

"अब शिकार, शिकारी को नहीं देख सकता," दानिश ने धीरे से कहा।

खून से सनी रात

होटल के बाहर खड़े लोगों को कुछ समझ नहीं आया। जैसे ही वे होटल के गेट की ओर बढ़े, अचानक वहाँ से धायं-धायं-धायं! गोलीबारी की आवाज़ गूंज उठी।

"घात लगाकर बैठे थे हरामी!" रफीक का एक आदमी चिल्लाया।

होटल के ऊपर बनी बालकनी से रिज़वान के स्नाइपर्स ने निशाना लगाना शुरू कर दिया था। वे छिपकर फायरिंग कर रहे थे, जबकि रफीक के लोग खुले में थे।

"कवर लो!" रफीक चिल्लाया, लेकिन तब तक दो लोग नीचे गिर चुके थे।

अंदर, दानिश ने अपने लोगों को इशारा किया।

"अब हम बढ़ेंगे!"

वह, कबीर और बाकी गार्ड्स लॉबी की ओर बढ़ने लगे।

होटल के कांच के दरवाजे अब पूरी तरह टूट चुके थे। गोलियों की बौछार जारी थी।

कबीर के हाथ में भी गन थी, लेकिन उसका दिल तेजी से धड़क रहा था।

"यह तेरा पहला टेस्ट है, कबीर," दानिश ने कहा। "अगर जिंदा रहना है, तो अब सोचने का वक्त नहीं है।"

कबीर ने सिर हिलाया और पहली बार किसी पर गोली चलाई।

धायं!

गोली सीधे रफीक के एक आदमी की छाती में लगी।

"शाबाश!" दानिश ने कहा।

लेकिन तभी...

रफीक खुद होटल के अंदर आ गया।

आमना-सामना

दानिश और रफीक अब आमने-सामने थे।

"बहुत होशियार बनता है न तू?" रफीक ने कहा, उसके हाथ में गन चमक रही थी।

"तेरी पहली गलती थी मुझे मारने की साजिश करना," दानिश ने मुस्कुराकर कहा। "और दूसरी गलती थी… आज मेरे इलाके में घुसना।"

रफीक हँसा। "देखते हैं किसकी गलती भारी पड़ती है!"

और फिर दोनों ने एक साथ अपनी बंदूकें उठा लीं।

शहर का सबसे महंगा होटल – एक खतरनाक रात 

अंधेरे में मौत का खेल

होटल के भीतर बंदूकों की गूंजती आवाज़ें, शीशों के टूटने की खनक, और दर्द से कराहते लोगों की चीखें माहौल को भयानक बना रही थीं। लेकिन इस अंधेरे में असली खेल अब शुरू हुआ था।

दानिश और रफीक के बीच का यह आमना-सामना किसी आम लड़ाई जैसा नहीं था—यह बरसों की दुश्मनी का आखिरी अध्याय लिखने का वक्त था।

रफीक ने बिना वक्त गवाएं ट्रिगर दबाया—धायं!

गोली सीटी बजाती हुई निकली, लेकिन दानिश पहले ही एक मेज के पीछे कूद चुका था। वह रफीक को हल्के में लेने वालों में से नहीं था।

कबीर, जो अब तक सिर्फ तमाशा देख रहा था, घबराहट में एक किनारे दुबका हुआ था। उसकी हथेलियों में पसीना था, लेकिन दानिश की दी हुई गन अब भी उसकी पकड़ में थी।

"भाई, हमें क्या करना चाहिए?" कबीर ने घबराई आवाज़ में पूछा।

दानिश ने अपनी पिस्टल को कसकर पकड़ा और फर्श पर घुटनों के बल झुकते हुए कबीर को देखा।

"अब वक्त आ गया है, कबीर। अगर डर गया, तो आज की रात हमारी आखिरी होगी।"

होटल का जलता हुआ मैदान

बाहर, रिज़वान और उसके स्नाइपर्स अभी भी दुश्मनों पर भारी पड़ रहे थे। लेकिन रफीक के पास सिर्फ बंदूकें नहीं थीं—उसके पास प्लान भी था।

"पीछे की एंट्री से घुसो!" उसने अपने लोगों को मैसेज किया।

चंद ही सेकंड बाद, होटल के पिछले दरवाजे पर एक जबरदस्त विस्फोट हुआ—बूम!

"सालों ने हमें चारों ओर से घेर लिया है!" रिज़वान चिल्लाया।

दानिश बनाम रफीक – आखिरी जंग

होटल की लॉबी अब धुंए और गनशॉट्स से भरी थी। दोनों ओर से आदमी गिर रहे थे, लेकिन असली लड़ाई अब शुरू हुई थी।

रफीक और दानिश एक-दूसरे के सामने थे, उनके चारों ओर लाशें बिछ चुकी थीं।

रफीक ने ठंडी हंसी हँसी। "बहुत चालाक बनता था, लेकिन आज तेरा खेल खत्म।"

"खेल तो अभी शुरू हुआ है," दानिश ने आँखें चमकाते हुए कहा।

और फिर दोनों ने एक साथ फायर किया।

धायं-धायं-धायं!

गोली चली, हवा में सनसनाहट हुई, और अगले ही पल…

रफीक ने सीने पर हाथ रखा। उसकी सफेद शर्ट लाल हो चुकी थी।

"न…नहीं!" वह हांफते हुए पीछे गिर पड़ा।

दानिश उसके पास आया, घुटनों के बल बैठा और धीरे से फुसफुसाया—

"ये शहर सिर्फ एक ही शेर को देख सकता है।"

एक नई सुबह

रफीक मर चुका था। उसके आदमियों ने भागने की कोशिश की, लेकिन रिज़वान और बाकी लोगों ने उन्हें खत्म कर दिया।

होटल के फर्श पर बिखरे खून और टूटे कांच के बीच, कबीर ने अपनी बंदूक को देखा।

"हम जीत गए?" उसने कांपती आवाज़ में पूछा।

दानिश ने एक लंबी सांस ली और अपने छोटे भाई के कंधे पर हाथ रखा।

"ये सिर्फ एक जंग थी, कबीर। असली लड़ाई अभी बाकी है।"

(अगला भाग जल्द ही...)