आज़ादी का सुख
एक गली में कल्लू और भूरी नाम के एक देसी कुत्तों का एक जोड़ा रहता है | उसी गली में विदेशी नस्ल का एक और जोड़ा भी एक बड़े बंगले में रहता है, जिन्हें उनके मालिक प्यार से जैकी और लूसी नाम से बुलाते हैं | कल्लू और भूरी जन्म से ही इसी गली में रह रहे हैं | शुरू से इसी गली में रहने के कारण वे यहाँ के हर परिवार से अच्छी तरह वाकिफ़ हैं | दोनों की ज़िंदगी परेशानियों से भरी हुई है | उनका गुज़ारा गली के लोगों द्वारा फेंकी गई सूखी रोटियाँ और खाने की जूठन से होता है | वे रोज़ हर घर के सामने जाकर बैठ जाते और इंतज़ार करते कि कोई तरस खाकर उन्हें कुछ खाने को दे दे | कभी कोई कुछ दे देता और कई बार उन्हें डाँटकर या मारकर भगा दिया जाता है | कभी-कभी ही उनका पेट भर पाता है | ज़्यादातर दिन वे भूखे ही सोते हैं | हर मौसम उनके लिए मुश्किलें लेकर आता है | गर्मियों की तपती धूप में वे सिर छुपाने के लिए इधर-उधर भटकते रहते हैं | कुछ बरस पहले तक गली में कई पेड़ थे जिनके नीचे उन्हें आसरा मिल जाता था, लेकिन अब वे भी नहीं हैं | प्यास से हलक़ सूखता रहता है, लेकिन पानी नसीब नहीं होता है | बारिशों में तो और भी दुर्गति होती है | रात में तो सड़क पर खड़ी कारों के नीचे आसरा मिल जाता है, लेकिन दिन में पानी में भीगते रहने के अलावा और कोई चारा नहीं होता है | और सर्दियों में कड़कड़ाती ठंड में वे खुले आसमान के नीचे सिकुड़े हुए पड़े रहते हैं | हमेशा डर लगा रहता कि कोई गाड़ी उन्हें कुचलती हुए न चली जाए |
पिछले साल बारिश के मौसम में भूरी को चार बच्चे हुए थे | उसको गर्भवती जानकर किसी परिवार ने उसे अपने घर में घुसने नहीं दिया | मजबूरी में उसे बच्चों को पार्क में लगी बेंच के नीचे ही जन्म देना पड़ा था | रात भर वे बारिश में बुरी तरह भीगते रहे थे | सुबह पड़ोस के एक परिवार ने रहम करके उसे और उसके बच्चों को अपने गैरेज में आश्रय दिया था | उनके इस उपकार से बच्चे बच तो गए, लेकिन उन्हें ज़िन्दा रखना एक बड़ी समस्या थी | भूरी को कम ख़ुराक मिलने की वजह से बच्चों को भी दूध कम मिलता था | उसके गोल-मटोल बच्चे बहुत जल्द दुबले और कमज़ोर दिखने लगे थे | उनकी गिरती सेहत देखकर भूरी का मन रोता था, लेकिन वह बेबस थी | उनको कहाँ से खिलाए ? जैसे-तैसे बच्चे बड़े होने लगे, लेकिन उस साल की कड़कड़ाती ठंड बच्चों के लिए असहनीय थी | सब बच्चों को वह ख़ुद से चिपकाकर सुलाती, लेकिन बदन की गर्मी उनको कंपकपाती हुई ठंड से बचाने में नाकाफ़ी साबित हुई थी | बच्चे बेरहम ठंड का सामना ना कर पाए और एक-एक करके तीन बच्चों ने दम तोड़ दिया | बस एक ही बच्चा बचा था - छोटू | बच्चों की असमय मौत ने उसे अंदर से तोड़ दिया था, लेकिन फिर भी पेट तो भरना था | उसकी किस्मत में बच्चों की मौत का मातम मनाने के लिए वक्त कहाँ था ? वह फिर से घरों के सामने बैठ कर इंतज़ार करती रहती कि कोई तरस खाकर उसे और उसके बच्चे को खाने के लिए कुछ दे दे |
अपनी इस दयनीय हालत में भूरी को सामने के बंगले में रहने वाले जैकी और लूसी को देखकर बहुत ईर्ष्या होती थी | वह हमेशा सोचती रहती, “वे दोनों कितने आराम की जिंदगी बसर कर रहे हैं - न खाने-पीने की चिंता और न ही बदलते मौसम का डर | समय पर उनको अच्छा खाना मिलता है | वह अक्सर उन्हें गोश्त और विदेशी खाना खाते हुए देखती थी | उनको हर हफ्ते साबुन और शैंपू से नहलाया जाता था, जिससे वे ख़ूबसूरत और तंदुरुस्त दिखते हैं | रोज़ाना सुबह मालिक उनको टहलाने ले जाते हैं | हर मौसम में उनका खास ख्याल रखा जाता है | बीमार पड़ने पर डॉक्टर के द्वारा अच्छा इलाज होता है | और एक यहाँ हम हैं, जिनका कोई ध्यान रखने वाला नहीं है | सड़क पर पैदा होते हैं और सड़क पर ही मर जाते हैं | रोटी के एक-एक टुकड़े के लिए लड़ना पड़ता है और अगर एक बार बीमार पड़ गए तो बचना मुश्किल |”
भूरी की कई बार इच्छा होती कि वह उन दोनों से बात करे लेकिन उनके मालिक हमेशा उसे मार कर भगा देते थे | एक बार लूसी को गेट के पास खड़ा देखकर भूरी डरते-डरते उसके पास गई | लूसी बहुत सीधी और सुंदर जान पड़ रही थी | आज पहली दफ़ा उसे नज़दीक से देखने का मौका मिला था | उसे सकुचाते देख लूसी बोली, “बहन, कैसी हो ? हमेशा तुम्हें दूर से देखती हूँ | बात करने की भी इच्छा हुई, लेकिन कभी कर न पाई | आज पहली दफ़ा तुमसे बात करने का मौका मिला है |” भूरी ने कुछ हकलाते हुए कहा, ”बहन, हमारी जिंदगी भी कोई ज़िन्दगी है | हर वक्त दूसरों के सामने गिड़गिड़ाते रहते हैं | सामने वाले का मन किया तो दो टुकड़े डाल दिए, नहीं तो मार कर भगा दिया | रोटी के टुकड़ों के लिए रोज़ लड़ना पड़ता है | हम हर मौसम में मरते हैं | जिसका मन चाहे पत्थर मार कर चला जाता है | बीमार पड़े तो कोई इलाज कराने वाला नहीं है | सड़क पर सोते हुए हमेशा डर लगा रहता है कि कोई गाड़ी कुचल न जाए | मर गए तो भी ठीक है, लेकिन अगर बच गए तो टूटे पैरों के सहारे जीना और भी मुश्किल हो जाएगा - न जी पाएँगे और न ही मर पाएँगे | आपने तो देखा ही होगा, कुछ महीने पहले मेरे तीन प्यारे बच्चे ठंड और भूख के कारण मर गए | लेकिन बच्चों की मौत पर भी मेरी किस्मत ने मुझे रोने न दिया | अगर बैठकर मातम मनाती तो पेट कैसे भरता ? देखिए कुछ दिनों बाद आपको भी बच्चे होने वाले हैं, लेकिन आपके मालिक आपका कितना ख्याल रख रहे हैं | मेरी शुभकामनाएँ हैं कि आपको सुँदर और स्वस्थ बच्चे हों | आप दोनों को देखकर मैं हमेशा ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ कि अगले जन्म में हमें भी किसी बड़े साहब के यहाँ पालतू बनाना, जिससे कि हम भी एक अच्छी ज़िंदगी जी सकें |” भूरी की बात सुनकर लूसी ने फ़ीकी हँसी हँसते हुए कहा, “हाँ, यह सच है कि हमें अच्छा खाना-पीना दिया जाता है, हमें मौसम की मार नहीं सहनी पड़ती है और न ही हमें छोटी-छोटी चीजों के लिए संघर्ष करना पड़ता है, लेकिन यह भी एक कड़वा सच है कि हम इस सुख-सुविधा की बड़ी कीमत चुका रहे हैं | हम तुम्हारी तरह आज़ाद नहीं है | दिन में ज्यादातर वक्त हमें ज़ंजीर से बाँधकर रखा जाता है | हम सारा दिन एक छोटी सी जगह में बिताते हैं, न ढंग से बैठ पाते हैं और न ही सो पाते हैं | देखो, बँधे-बँधे मेरे गले पर पट्टे का यह निशान भी बन गया है | तुम हमारी स्थिति को महसूस भी नहीं कर सकती हो | आज मैं जानती हूँ कि मेरे पैदा होने वाले बच्चों को मेरे मालिक उनके जन्म के कुछ ही दिनों बाद ग्राहकों को ऊँचे दामों पर बेच देंगे | पिछली बार भी मेरे साथ यही हुआ था और आगे भी ऐसा ही होता रहेगा | मेरे नसीब में अपने बच्चों को सीने से लगाकर प्यार करने का सुख भी नहीं है | मालिक के लिए मैं और जैकी सिर्फ़ मशीने हैं, जिनका काम उन्हें समय-समय पर सुन्दर-सुन्दर पिल्ले मुहैया कराना है, जिन्हें बेचकर वह ज़्यादा से ज़्यादा पैसा कमा सकें | भविष्य में जब हम बूढ़े और बीमार हो जाएँगे तो यही मालिक हमें लात मार कर घर से बाहर निकाल देंगे, सड़क पर | मेरी माँ के साथ भी उन्होंने यही किया था | घरों में पलने वाले कुत्ते तुम लोगों की तरह संघर्षपूर्ण जीवन के आदी नहीं होते हैं और फिर सड़क के कुत्ते उन्हें काटने दौड़ते हैं | ऐसे हालात में हमारी ज़िंदगी का आख़िरी वक़्त बहुत ही तकलीफ़देय होता है | अपने जीवन में हर पल संघर्ष करने और मुसीबतों को झेलने के बावजूद भी तुम लोग आज़ाद हो और तुम्हारे बच्चे सिर्फ़ तुम्हारे हैं | यह बेशकीमती सुख हमारे नसीब में कहाँ ? अब तुम ही बताओ क्या तुम मेरी जैसी ज़िन्दगी जीना पसंद करोगी ?” लूसी की कहानी सुनकर भूरी का दिल भर आया और वह मन ही मन में सोचने लगी, “बाहर से इतनी सुखी दिखने वाली लूसी के दिल में कितना दु:ख है | ऐसा नारकीय ज़िंदगी जीते हुए भी वह हमेशा मुस्कुराती हुई दिखती है | मैं तो ऐसी ज़िंदगी जीने की कल्पना भी नहीं कर सकती हूँ | लूसी के दुःख के सामने मेरे दुःख बहुत छोटे दिखाई दे रहे हैं | हमारी ज़िन्दगी तमाम संघर्षों के बावजूद भी लूसी की ज़िन्दगी से कहीं ज्यादा सुखी है |”