भाग – 7 जिगर चौधरी
चरण जी को ये बात पता थी... की आदित्य और हिरदेश जी के बीच आये दिन कुछ न कुछ खटपट होती रहती है लेकिन कभी कभी बात इतनी ज्यादा बढ़ जाएगी ये नहीं पता था। पर कभी कबार वे भी अपने पोते की मोह में हिरदेश जी को फटकार लगा देते थे... इस बात से आदित्य काफी खुश भी हो जाता, पर उसकी ये ख़ुशी ज्यादा देर तक टिकती नहीं थी। चरण जी हिरदेश जी के साथ साथ आदित्य को भी काफी सख्त हिदायत के साथ डांटते थे, इसलिए आदित्य चरण जी के रहते अपने डैड को कुछ ना बोल पाता।
शाम होने चली थी। उधर राधनपुर में मीठी और किंजल छत पे बैठी चाय पि रही थी... की तभी प्रतिक वहा आता है और जोर जोर से चिल्लाने लगता है...
प्रतिक - सुनो... सुनो... सुनो, भाईओ और उनकी बहनो। नहीं... नहीं, एक मिनिट यहाँ भाई तो है ही नहीं। यहाँ तो सिर्फ बहने ही है। हां तो बहनों और बहनो... दिल थाम के बैठो क्यों की आपके दिल की धड़कन रुकने वाली है।
किंजल - मोटे, तू कहना क्या चाहता है... साफ़ साफ़ बोलना।
प्रतिक - ओहो जीजी, क्या आप थोड़ी देर के लिए चुप नहीं रह सकती। कितना मस्त ड्रामा कर रहा था।
मीठी - प्रतिक, क्या कर रहे हो तुम ? और ऐसी कौनसी खबर है जो तुम हमारी धड़कने रुकवाना चाहते हो ?
प्रतिक - अरे जीजी, बहुत ही अच्छी खबर है। इसलिए कृपया करके आप दोनों चुप चाप बैठी रहिये।
मीठी और किंजल अपनी एक उंगली मुँह पर रख के चुप चाप अच्छे स्टूडेंट की तरह बैठ जाती है...
प्रतिक - हाँ तो में कहा था... हां, याद आया...!!! हाँ तो बहनो अपना दिल थाम के बैठो...!!!
किंजल - अरे यार, कितना टाइम दिल थाम के बैठना पड़ेगा ?
प्रतिक चिढ़ते हुए - जाओ, मुझे किसी से कुछ नहीं कहना।
वो गुस्से से निचे जाने लगता है। उसे जाता देख मीठी जल्दी से किंजल को डांटते हुए कहती है - क्या यार किंजू, देख हो गया न गुस्सा। तू थोड़ी देर चुप रहना।
किंजल बुरा सा मुँह बनाके - अच्छा ठीक है, चल मोटे आजा... नहीं बोलूंगी अब। बोल तुझे जो बोलना है।
प्रतिक - पहले मुझे सॉरी कहो... उसके बाद ही बताऊंगा।
किंजल - चल बे, आया बड़ा। में कोई सॉरी वोरी नहीं बोलने वाली।
प्रतिक - ठीक है फिर में जाता हु। में तो तुम दोनों के लिए सरप्राइज लेके आया था... लेकिन अगर तुमको नहीं देखना तो कोई बात नहीं।
कहके वो जाने लगता है। यह देख के मीठी और किंजल को बुरा लगने लगता है। इसलिए किंजल जल्दी से प्रतिक के सामने जाके खड़ी हो जाती है और प्रतिक के दोनों कान पकड़ लेती है।
किंजल - अले अले मेरा प्यारा सा, मोटा सा, क्यूट सा भाई बुरा मान गया...!!! सॉरी, चल अपनी जीजी को माफ़ करदे, अब में पक्का कुछ भी नहीं कहूँगी... तेरी कसम।
प्रतिक अपनेआप को छुड़ाते हुए - अरे जीजी, क्या कर रही हो ? ऐसे कौन मांगता है माफ़ी ? छोडो मुझे दर्द हो रहा है...!!!
मीठी हस्ते हुए - किंजू, अब छोड़ भी दे उसे... वरना कान टुटके हाथ में आ जायेंगे।
किंजल - अच्छा चल ठीक है, तुम कहती हो तो छोड़ देती हु। चल अब जल्दी से बता वो सरप्राइज क्या है... क्यों की मुझसे अब और सब्र नहीं हो रहा।
मीठी - हां प्रतिक, अब जल्दी से बता दो...!!! मुझे भी जानना है।
प्रतिक - ठीक है ठीक है बताता हु, तो मेरी प्यारी सिस्टर... अब आपके सामने वो आ रहा है... जिसको देखते ही आप उछल पड़ोगे, लेकिन इतना भी मत उछलना की छत से निचे ही गिर जाओ, बताओ... बताओ वो है कौन ?
मीठी और किंजल को कुछ समझ नहीं आ रहा था इसलिए वे दोनों अपना सिर ना में हिला देती है...
प्रतिक - चलो कोई बात नहीं में ही बता देता हु अरे बताता हु क्या दिखा ही देता हु... 3... 2... 1... टाडा......
उसके बाद वो दरवाजे से हट जाता है। मीठी और किंजल देखती है की वहा उन दोनों के हमउम्र का लड़का खड़ा होता है... जिसको देखते ही दोनों के चेहरे पर ना बया करने वाली मुस्कराहट आ जाती है फिर दोनों भागके उस लड़के के गले लग जाती है।
जिगर चौधरी... मीठी और किंजल का बेहद ख़ास दोस्त। गोरा रंग, घुंघराले बाल, गले में रुद्राक्ष का लॉकेट, कानो में दो छोटी छोटी बालिया। राधनपुर गांव के सरपंच का बेटा। लड़कीओ की इज़्ज़त करने वाला, घमंड ना मात्र। बेहद ही साफ़ दिल का लड़का। कुलमिलाके एक दम हैंडसम राजस्थानी बंदा । वैसे गांव की कई लड़किया जिगर पर लट्टू भी है... पर जिगर ने आज तक किसी लड़की को गलत नजरो से देखा नही।
मीठी और किंजल दोनों जिगर के गले रही होती है की तभी प्रतिक की आवाज आती है - लगता है यहाँ बाढ़ आने वाली है। हमे कही और रहने का बंदोबस्त करना पड़ेगा।
प्रतिक की बात सुनके तीनो अलग होते है और असमझ में प्रतिक को देखते है क्यों की उसकी बाते तीनो समझ नहीं पाते।
जिगर - क्या मतलब... समझ नहीं आया ??
प्रतिक - अरे भैया, आप देखो इन दोनों को... मुझे तो लगा था की आपको देखने के बाद खुश होगी लेकिन ये तो रोने लगी, ऐसा लग रहा है की इनकी आँखों का पानी पुरे गाँव को ना डूबा दे।
प्रतिक की बात सुनके सभी हसने लगते है। वही जिगर तो बस मीठी की हसी में खो गया। मीठी के चेहरे की मुस्कराहट देख के जिगर के दिल में हलचल होने लगती है। जिगर बचपन से ही मीठी को पसंद करता है लेकिन अभी ये बात किसी को पता नहीं थी सिवाय किंजल के।
किंजल प्रतिक से - बदमाश, बहुत बोलने लगा है तू आज कल। ( फिर जिगर को देख के ) वैसे जिगर, तुम आये कब ? आये तो आये पर तुमने हमे एकदम चौका ही दिया यार, क्या सरप्राइज दिया है तुमने मतलब मजा ही आ गया।
मीठी - हां जिगर, तुम कब आये ? बोलो ना..!!!
जिगर - अरे बस बस तुम दोनों बोलने दोगी तब तो बोलूंगा न में। वो में कल ही आया था, सोचा था कल रात को तुमसे मिलु पर वो क्या है न की दिल्ली से यहाँ तक कार में सफर किया तो थोड़ी कमर अकड़ गयी थी और काफी थक गया था फिर सोचा की रात को मिलने से अच्छा सुबह में ही आप देविओ के दर्शन करदु... तो मेरी थकान भी मिट जाएगी और दिन भी बन जायेगा। लेकिन सुबह भी नहीं आ पाया। बाबा सा के गेस्ट आये थे तो उनके साथ बहार गया था, अभी थोड़ी देर पहले ही आया हु घर पे। इसलिए मेने सोचा की कोई और आ जाये इससे पहले में यहाँ आ जाऊ। तो में आ गया।
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राधे राधे...
कहानी अभी जारी है...