Tere Ishq me ho jaau Fannah - 6 in Hindi Love Stories by Sunita books and stories PDF | तेरे इश्क में हो जाऊं फना - 6

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तेरे इश्क में हो जाऊं फना - 6

एक अनजानी रात

होटल की हिंसा और खून से भरी रात के बाद, दानिश अकेला अपने कमरे में आ गया। बाहर अभी भी हलचल थी, लेकिन अब उसे किसी की परवाह नहीं थी। वह थक चुका था—जिस्म से भी और रूह से भी।

जैसे ही उसने दरवाजा बंद किया, कमरे में घना अंधेरा था। उसने धीमे कदमों से बाथरूम की तरफ बढ़कर शावर चालू कर दिया। पानी की गर्म बूंदें उसके बदन पर गिरने लगीं, मानो उसकी थकान और गुनाह दोनों को धोने की कोशिश कर रही हों।

कुछ देर बाद, टॉवल लपेटे हुए वह बाहर निकला। लेकिन जैसे ही उसने बिस्तर की ओर देखा, उसकी साँसें थम गईं।

समीरा।

बिस्तर पर दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की सो रही थी।

उसके लंबे घने बाल उसके चेहरे पर बिखरे हुए थे, उसकी साँसें हल्की लेकिन गहरी थीं। उसने एक हॉट ड्रेस पहन रखी थी, जो उसकी नशीली खूबसूरती को और भी उभार रही थी। उसके गुलाबी होंठों पर हल्की मुस्कान थी, मानो कोई मीठा ख्वाब देख रही हो।

दानिश के माथे पर शिकन आ गई।

यह लड़की कौन है? और यहाँ कैसे पहुँची?

उसने धीरे-से समीरा की तरफ कदम बढ़ाए। उसके पास पहुँचकर उसने गौर से देखा। समीरा शराब के नशे में थी।

उसने हल्की आवाज़ में कहा, "तुम कौन हो?"

कोई जवाब नहीं आया। समीरा हल्के-से करवट लेकर और भी करीब आ गई।

उसके बदन से महंगे परफ्यूम की खुशबू आ रही थी, जो पूरे कमरे में फैल चुकी थी।

दानिश का दिल पहली बार थोड़ी देर के लिए तेज़ी से धड़कने लगा। उसने बहुत से खूबसूरत चेहरे देखे थे, लेकिन इस लड़की में कुछ अलग था।

वह झुका, समीरा के चेहरे के करीब आया, और धीरे से कहा, "तुम मेरी मौत बन सकती हो, खूबसूरत अजनबी।"

समीरा ने हल्के से करवट बदली, उसकी उंगलियाँ दानिश के हाथ से हल्के से टकराईं।

बेकाबू रात, 

समीरा ने हल्की करवट बदली, उसकी उंगलियाँ दानिश के हाथ से छू गईं। उस नर्म छुअन में कुछ ऐसा था कि दानिश ठिठक गया।

समीरा की आँखें अभी भी बंद थीं, लेकिन उसकी साँसों की गहराई बता रही थी कि वह आधी नींद में थी। दानिश उसके चेहरे के करीब झुका, उसकी साँसों की हल्की गर्माहट महसूस कर सकता था।

"तुम कौन हो?" दानिश ने फुसफुसाया।

समीरा ने आँखें खोलीं। उनकी गहराई में एक अजीब-सा नशा था—शराब का, या शायद खुद दानिश का। उसने धीमे से मुस्कुराते हुए कहा, "जो भी समझ लो..."

दानिश के होंठों पर हल्की-सी मुस्कान आई। वह उसके करीब गया, लेकिन तभी समीरा ने हल्के से उसके सीने पर हाथ रख दिया।

"नहीं…" उसकी आवाज़ काँपी, मगर उसमें कोई खास मजबूती नहीं थी।

दानिश के होंठों के किनारे शरारती लहजा उभरा। "तुम्हारी आँखें तो कुछ और कह रही हैं," उसने धीमे से कहा, और उसकी उंगलियाँ समीरा की बाहों को हल्के से छू गईं।

समीरा का दिल जोर से धड़कने लगा। उसने आँखें मूँद लीं, जैसे खुद को रोकने की कोशिश कर रही हो। लेकिन दानिश की उँगलियों की तपिश उसके जिस्म पर गहराई तक उतर रही थी।

"रोक सकती हो तो रोक लो…" दानिश ने सरगोशी की, और समीरा का बदन एक सिहरन से भर गया।

समीरा ने एक आखिरी बार उसकी ओर देखा—उसकी आँखों में वो चाहत थी, जिसे शब्दों में नहीं बाँधा जा सकता। अगले ही पल, उसने खुद को दानिश के करीब खींच लिया।

रात लंबी थी… और अब किसी के पास खुद को रोकने की ताकत नहीं थी।

एक अनजानी रात – अधूरी प्यास

समीरा के बदन से उठती ख़ुशबू जैसे दानिश के होश उड़ा रही थी। उसकी उंगलियाँ अब भी उसकी बाहों पर थी, लेकिन अब उन दोनों के बीच सिर्फ़ सांसों की दूरी थी। कमरे की हल्की रोशनी में समीरा की त्वचा दमक रही थी—मखमली, मुलायम, और बेहद मोहक।

उसने आँखें बंद कर लीं, उसकी सांसें तेज़ हो रही थीं। दानिश ने उसके चेहरे पर गिरे बालों को धीरे से पीछे किया, उसकी उंगलियाँ जैसे ही समीरा की गर्दन पर फिसलीं, उसने हल्का-सा काँपकर उसकी ओर देखा।

"तुम्हें पता है, तुम बहुत ख़तरनाक हो," दानिश ने हल्के स्वर में कहा।

समीरा मुस्कुराई, उसकी आँखों में एक शरारती चमक थी। "और तुम बहुत तेज़," उसने धीरे से कहा, उसकी आवाज़ किसी मोहक धुन की तरह थी।

दानिश ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा और उसे अपने करीब खींच लिया। अब उनके शरीर के बीच कोई फासला नहीं बचा था। उसके होंठ समीरा के गालों के पास आए, लेकिन छुए नहीं—बस उसकी गर्म सांसों ने समीरा को और बेचैन कर दिया।

"तुम्हें डर नहीं लगता?" समीरा ने हल्की आवाज़ में कहा।

दानिश ने उसकी ठोड़ी को हल्के से ऊपर किया, उसकी आँखों में गहरे उतरते हुए बोला, "डर और तुम एक साथ नहीं आते।"

समीरा का दिल तेज़ी से धड़क रहा था। उसकी उंगलियाँ धीरे-धीरे दानिश की शर्ट के बटन खोलने लगीं, और उसकी आँखें उसे पढ़ रही थीं—जैसे देखना चाहती हो कि कहीं वो भी उतना ही बेकाबू हो रहा है जितना वो।

दानिश ने समीरा की कमर पर हाथ रखा, उसके करीब झुकते हुए। उनके होंठ अब सिर्फ़ एक हल्की दूरी पर थे, और फिर जैसे ही समीरा ने आँखें बंद कीं, दानिश ने उसके होंठों को अपने होंठों में समा लिया।

एक हल्का करंट दोनों के जिस्म में दौड़ गया। यह कोई मासूम-सा किस नहीं था, बल्कि उनके भीतर दबी हर ख़्वाहिश को उजागर कर रहा था।

समीरा की उंगलियाँ अब दानिश की गर्दन के पीछे थीं, उसे और करीब खींचते हुए। दानिश ने उसकी कमर को और कस लिया, उसके बदन की गर्माहट को अपने अंदर महसूस किया।

"अब रोक सकती हो तो रोक लो," दानिश ने उसकी गर्दन पर हल्की साँस छोड़ते हुए कहा।

समीरा ने उसकी शर्ट उतार दी और अपनी नर्म हथेलियों को उसकी मजबूत छाती पर फिराया। उसकी उंगलियाँ जैसे ही उसके कंधों पर फिसलीं, दानिश ने एक झटके में उसे बिस्तर पर लिटा लिया।

समीरा ने एक धीमी मुस्कान दी, लेकिन उसके चेहरे पर अब भी हल्की झिझक थी। दानिश ने झुककर उसके कानों के पास फुसफुसाया, "अगर चाहो तो मैं रुक सकता हूँ..."

समीरा ने अपनी आँखों में वही पुरानी शरारत लिए कहा, "अब बहुत देर हो चुकी है..."

एक अनजानी रात – अधूरी प्यास का इकरार

समीरा अब दानिश के नीचे थी, उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं। कमरे में हल्की रोशनी फैली थी, और खिड़की के बाहर बहती ठंडी हवा उनकी गर्म होती साँसों को और भी बेचैन कर रही थी।

दानिश ने उसके चेहरे पर हल्के-से बालों को हटाया, उसकी उँगलियाँ उसकी गालों पर फिसल गईं। समीरा ने अपनी पलकों को धीरे से झपकाया, उसकी आँखों में गहराई थी—एक ऐसा समंदर, जिसमें डूबना ही एकमात्र रास्ता था।

"तुम्हें छूने की इजाज़त है?" दानिश ने फुसफुसाया, उसकी आवाज़ में एक कशिश थी।