TOOTE HUE DILON KA ASHPATAAL in Hindi Love Stories by Mehul Pasaya books and stories PDF | टूटे हुए दिलों का अश्पताल - 18

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टूटे हुए दिलों का अश्पताल - 18

एपिसोड 18 – साज़िश की परतें

रात का तीसरा पहर था। अस्पताल के गलियारे शांत थे, लेकिन ICU के पास माहौल कुछ अलग था। स्नेहा की हालत स्थिर थी, लेकिन उसका डर अभी भी उसकी आँखों में झलक रहा था। भावेश वहीं बैठा था, लेकिन उसके चेहरे पर चिंता के साथ कुछ और भी था—जैसे कोई बोझ उसे अंदर ही अंदर खा रहा हो।

आदित्य और इंस्पेक्टर राजवीर अभी तक इसी सोच में थे कि आखिर स्नेहा पर हमला करने वाला कौन हो सकता है।

"हमें उससे जल्द से जल्द बात करनी होगी," राजवीर ने कहा।

"पर वो अभी भी सदमे में है। अगर हम उस पर दबाव डालेंगे, तो शायद वो और टूट जाए," आदित्य ने चिंता जताई।

राजवीर कुछ सोचते हुए बोले, "पर अगर हम इंतजार करेंगे, तो शायद वो हमलावर अगला कदम उठा ले।"

तभी स्नेहा के ECG मशीन की बीप अचानक तेज हो गई। सभी तुरंत दौड़कर अंदर गए। नर्सों ने उसे संभालने की कोशिश की, लेकिन उसकी साँसें तेज हो रही थीं।

"नहीं... मुझे बचाओ... वो फिर आएगा!" स्नेहा घबराकर बोली।

"कौन, स्नेहा? कौन आएगा?" आदित्य ने उसका हाथ पकड़ते हुए पूछा।

उसकी आँखों में आँसू थे। उसने काँपते हुए होंठों से एक नाम लिया—"अर्जुन..."


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अर्जुन कौन था?

इस नाम ने सबको चौंका दिया।

"अर्जुन कौन है?" राजवीर ने भावेश से पूछा।

भावेश चौंक गया। "अर्जुन...? नहीं, ये नाम मैंने पहले कभी नहीं सुना।"

राजवीर ने आदित्य की ओर देखा, फिर दोनों ने तय किया कि उन्हें स्नेहा की पर्सनल लाइफ की गहराई में जाना होगा।


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स्नेहा का अतीत – एक दर्दनाक सच

अगली सुबह, आदित्य ने स्नेहा की कॉलेज की पुरानी तस्वीरें और रिकॉर्ड खंगाले। कई तस्वीरों में एक ही चेहरा बार-बार सामने आ रहा था—अर्जुन।

"तो ये है अर्जुन," आदित्य ने तस्वीर देखते हुए कहा।

तस्वीर में अर्जुन और स्नेहा काफी खुश दिख रहे थे। लेकिन अगर वे इतने अच्छे दोस्त या शायद कुछ और थे, तो फिर ऐसा क्या हुआ कि अब उसका नाम लेते ही स्नेहा डर से काँपने लगी?

राजवीर ने अर्जुन की डिटेल्स निकालने के लिए अपनी टीम को आदेश दिया।

कुछ घंटों बाद रिपोर्ट आई—अर्जुन सिर्फ स्नेहा का दोस्त नहीं था, बल्कि उसका एक्स-बॉयफ्रेंड था। और सबसे चौंकाने वाली बात—अर्जुन पिछले एक साल से गायब था।

"क्या मतलब गायब था?" आदित्य ने हैरानी से पूछा।

"मतलब, उसने एक साल पहले अचानक कॉलेज छोड़ दिया और उसके बाद उसका कोई अता-पता नहीं चला। किसी को नहीं पता कि वो कहाँ गया, न ही उसके परिवार को," राजवीर ने बताया।

"तो क्या स्नेहा जानती थी कि वो कहाँ गया?" आदित्य ने सोचा।

"अगर जानती भी होगी, तो भी वो बताने से डर रही है," राजवीर ने गंभीर स्वर में कहा।


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अस्पताल में फिर से हलचल

उसी रात, जब आदित्य अपनी केबिन में बैठा था, तब अचानक लाइट्स झपकने लगीं। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था।

वह जैसे ही बाहर निकला, देखा कि ICU के पास एक साया खड़ा था।

"कौन है वहाँ?" आदित्य ने आवाज़ लगाई।

साया हिला और धीमे-धीमे आगे बढ़ने लगा।

आदित्य ने बिना देर किए दौड़ लगाई, लेकिन जब वह वहाँ पहुँचा, तो कोई नहीं था। केवल हवा में हल्की सी परफ्यूम की खुशबू थी, जो कुछ जानी-पहचानी लग रही थी।

"क्या ये अर्जुन था?"

अब मामला और भी पेचीदा हो गया था। क्या अर्जुन वापस आ गया था? अगर हाँ, तो क्या वो स्नेहा को खत्म करने आया था?

इस रहस्य का पर्दा कब उठेगा?

(जारी रहेगा...)