एपिसोड 16 – एक अनसुनी दास्तान
रात के अंधेरे में अस्पताल की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ था। नाइट शिफ्ट के डॉक्टर और नर्सें अपने-अपने काम में लगी थीं, लेकिन कुछ चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ झलक रही थीं।
आदित्य अपने केबिन में बैठा कुछ फाइल्स देख रहा था कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। उसने सिर उठाकर देखा—वहां नर्स राधिका खड़ी थी।
"सर, एक नया केस आया है। मरीज की हालत बहुत नाजुक है।"
"क्या हुआ है उसे?" आदित्य ने चिंतित स्वर में पूछा।
"सर, एक लड़की है, जिसकी उम्र करीब 22 साल है। उसे बुरी तरह जला दिया गया है। किसी ने पेट्रोल डालकर आग लगाने की कोशिश की। अभी वह बेहोश है, लेकिन जलने की वजह से शरीर का 60% हिस्सा बुरी तरह प्रभावित हुआ है।"
यह सुनकर आदित्य के रोंगटे खड़े हो गए। उसने बिना समय गवाएं राधिका को स्ट्रेचर ICU में ले जाने को कहा और खुद तुरंत ऑपरेशन थिएटर की ओर भागा।
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एक दर्द भरी सच्चाई
ICU में मरीज को वेंटिलेटर पर रखा गया था। डॉक्टर अनिरुद्ध और नर्सिंग स्टाफ उसकी हालत को स्थिर करने की कोशिश कर रहे थे। आदित्य जैसे ही अंदर पहुंचा, उसने लड़की के जलने के निशानों को देखा। उसकी सांसें तेज हो गईं। यह किसी हादसे से ज्यादा, एक क्रूर साजिश लग रही थी।
"सर, हमें इस केस की जानकारी पुलिस को भी देनी होगी," नर्स ने धीमी आवाज में कहा।
आदित्य ने गहरी सांस ली। "हां, लेकिन पहले हमें उसे बचाने की कोशिश करनी होगी।"
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भावेश का अतीत फिर से सामने आया
जैसे ही केस की जानकारी पुलिस तक पहुंची, एक इंस्पेक्टर अस्पताल पहुंचा। उसने लड़की की तस्वीर दिखाते हुए आदित्य और भावेश से पूछा, "आप में से किसी ने इसे पहले देखा है?"
भावेश, जो वहीं खड़ा था, अचानक कांप गया। उसकी आंखें एक पल के लिए चौड़ी हो गईं, और चेहरे पर घबराहट आ गई।
"भावेश, क्या हुआ?" आदित्य ने पूछा।
भावेश ने कांपते हुए तस्वीर को फिर से देखा और बोला, "ये... ये स्नेहा है..."
"स्नेहा कौन?" आदित्य ने चौंकते हुए पूछा।
भावेश ने गहरी सांस ली और अपनी पुरानी यादों में खो गया।
"स्नेहा मेरी मंगेतर थी। लेकिन कुछ महीने पहले अचानक वह मुझसे दूर हो गई। उसने मुझसे रिश्ता तोड़ दिया था, और फिर वह गायब हो गई। मुझे लगा था कि उसने अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने का फैसला कर लिया होगा। लेकिन अब इसे इस हालत में देखकर मैं अंदर तक हिल गया हूं..."
आदित्य और पुलिस इंस्पेक्टर ने एक-दूसरे को देखा। मामला अब और भी उलझ चुका था।
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स्नेहा की खामोश चीखें
रात के गहरे अंधेरे में अस्पताल के गलियारे में एक अजीब सी बेचैनी थी। ICU में स्नेहा की हालत अभी भी गंभीर थी। लेकिन अचानक, उसने अपनी उंगलियां हल्की सी हिलाईं।
"डॉक्टर... प्लीज... मुझे बचा लो..." उसने बहुत ही धीमी आवाज में कहा।
आदित्य तुरंत उसके पास गया। "स्नेहा, कौन था जिसने तुम्हारे साथ यह किया?"
स्नेहा की आंखों में आंसू थे, लेकिन वह पूरी तरह बोलने की हालत में नहीं थी। उसके फटे होंठ बस एक ही शब्द बुदबुदा रहे थे—"विश्वासघात..."
यह शब्द सुनते ही भावेश की आंखों में एक अजीब सा डर तैरने लगा। क्या स्नेहा के इस हालात के पीछे कोई बड़ा राज छुपा था?
आदित्य जानता था कि अब इस केस में सिर्फ इलाज ही नहीं, बल्कि सच तक पहुंचना भी जरूरी हो चुका था।
(जारी रहेगा...)