"रात 3:12 बजे की दस्तक" — इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक रात का सन्नाटा इतना गहरा था कि आरव को अपनी ही धमनियों में दौड़ते खून की आवाज़ सुनाई दे रही थी। घड़ी की सुइयां एक-दूसरे पर रेंग रही थीं। कमरे की खिड़की से आती चाँदनी दीवारों पर लंबी और टेढ़ी-मेढ़ी परछाइयाँ उकेर रही थी, जो किसी के हाथ की उंगलियों जैसी लग रही थीं।
मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 1
एपिसोड 1 — "रात 3:12 बजे की दस्तक"— इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तकरात का सन्नाटा इतना गहरा था कि आरव को अपनी ही धमनियों में दौड़ते खून की आवाज़ सुनाई दे रही थी। घड़ी की सुइयां एक-दूसरे पर रेंग रही थीं। कमरे की खिड़की से आती चाँदनी दीवारों पर लंबी और टेढ़ी-मेढ़ी परछाइयाँ उकेर रही थी, जो किसी के हाथ की उंगलियों जैसी लग रही थीं।तभी— ठक... ठक... ठक...आरव का शरीर पत्थर का हो गया। आवाज़ दरवाज़े से नहीं, बल्कि ...Read More
मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 2
आईने के पीछेपुरानी हवेलियों की अपनी एक ज़ुबान होती है। वे हवाओं के झोंकों में फुसफुसाती हैं, उनकी दीवारों दरारें गुज़रे हुए वक्त की कहानियाँ सुनाती हैं, और उनके अंधेरे कोनों में यादें धूल बनकर जम जाती हैं। आर्यन के लिए उसका पैतृक घर किसी भूलभुलैया से कम नहीं था। शहर की आपाधापी से दूर, पहाड़ों की गोद में बसा यह घर उसके दादा-दादी की आखिरी निशानी था।आर्यन एक लेखक था, और लेखक की सबसे बड़ी कमजोरी (या ताकत) उसकी कल्पनाशीलता होती है। वह यहाँ अपनी अगली किताब पूरी करने आया था। लेकिन उसे क्या पता था कि वह ...Read More