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बारिश ने पहाड़ को निगल लिया था। रात के दो बज रहे थे, और केदारनाथ की ओर जाने वाला...
“चलो” !!!! वह उसे साथ लिये डाइनिंग रूम में आ गई जहां अभी टेबल खाली थी। “बैठो” उस...
कमरे की उन बंद दीवारों के बीच, बाहर की दुनिया के तमाम शोर और सालम सिंह के हर खौफ...
स्पेसशिप का इंजन अब एक अजीब सी भारी आवाज़ के साथ धड़क रहा था। फर्श पर घुटनों के...
सोहन के हाथ आर्यमन के कंधे से ढीले पड़ गए। नीलम भाभी के चेहरे पर अब एक विजयी मुस्...
वह आज खुशी के मारे जॉय की स्कूल छुट्टी के आधे घंटे पहले ही पहुंच गया था इसलिए गे...
रामपुर नाम का एक छोटा सा गाँव था। उसी गाँव के आखिरी छोर पर एक टूटी-फूटी झोपड़ी म...
सूरज ढलने को था और रसोई से उठते धुएँ के बीच सरला जी चुपचाप खड़ी थीं। उनकी नज़र स...
राजपुरोहित जी आकर युवराज के सामने हाथ जोड़कर बोले,"खम्मा घणी, युवराज!"युवराज ने...
Mr. & Ms. FakeEpisode 21 – The Truth Behind the Videoरात के करीब ग्यारह बजे...सा...
अधूरी किताब – सीजन 2 एपिसोड 1 : रहस्यमयी किताब वाराणसी की रात हमेशा से रहस्यमयी मानी जाती थी। दिन में जितनी चहल-पहल रहती, रात होते ही शहर की पुरानी गलियाँ किसी अनकहे रहस्य में डू...
जिस गाँव का रास्ता रात में खत्म हो जाता था बिहार के एक छोटे-से जिले में एक गाँव था—भैरवपुर।नक्शे में उसका नाम था।सरकारी कागजों में उसका नाम था।वहाँ रहने वाले लोगों के राशन कार्ड, ज...
एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली। लेकिन अब— यहाँ सिर्फ सन्नाटा था। ऐसा सन्नाटा, जो कानों...
घना अंधेरा जंगल. रात का न जाने कौन- सा पहर था. चारों ओर ऐसा सन्नाटा पसरा हुआ था कि अपनी ही साँसों की आवाज किसी अनजान खतरे की आहट लग रही थी. आसमान को काले बादलों ने निगल लिया था और...
भाग 1: देवपुर रियासत सन 1926, भारत भूमि पर फिरंगियों का क्रूर शासन अपने चरम पर था। चारों ओर गुलामी की ज़ंजीरें जकड़ी हुई थीं, लेकिन उसी दौर में राजपूताने और जंगलों के बीच ब...
करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले ................... शिवनगर में हुए खौफनाक हादसे के आखिरी दिन एक विचित्र घटना घटी। हुआ यूँ कि आखिरी दिन बाबा बटेश्वर की नज़र गेरुआ धोती में लिपटी...
सड़क के दोनों ओर फैले घने, हरे-भरे पेड़ और हल्की छनकर आती धूप... ऐसा लग रहा था मानो किसी टीवी सीरियल का कोई खूबसूरत दृश्य चल रहा हो। रास्ता एकदम सुनसान और शांत था। इसी खूबसूरत राह...
गर्मी के दिन थे।घास फूस लगभग खत्म हो चली थी और पशुओं को चराने के लिए ज्यादा जगह भी नहीं बची थी गर्मी बढ़ जाने की वजह से तेज धूप हो जाती थी और दोपहर के वक्त गायों को छांव में इकठ्ठा...
ये उपन्यास सत्य पर एक ऐसी प्रेरित कहानी है, जो लिखने मे मुझे काफ़ी तकलीफ झेलनी पड़ी। कारण था, बस एक ही स्थान वही रहे और पात्र बदले जाये फिर सोचा नहीं सब कुछ ही सच हो।...
खामोश हवेली का रहस्य रात के सन्नाटे को चीरती हुई अयान मल्होत्रा की महँगी एसयूवी (SUV) शहर के शोर-शराबे से दूर, उस सुनसान इलाके की ओर बढ़ रही थी जहाँ बरसों पुरानी 'ब्लैकवुड हवे...
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