"रात 3:12 बजे की दस्तक" — इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक रात का सन्नाटा इतना गहरा था कि आरव को अपनी ही धमनियों में दौड़ते खून की आवाज़ सुनाई दे रही थी। घड़ी की सुइयां एक-दूसरे पर रेंग रही थीं। कमरे की खिड़की से आती चाँदनी दीवारों पर लंबी और टेढ़ी-मेढ़ी परछाइयाँ उकेर रही थी, जो किसी के हाथ की उंगलियों जैसी लग रही थीं।
मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 1
एपिसोड 1 — "रात 3:12 बजे की दस्तक"— इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तकरात का सन्नाटा इतना गहरा था कि आरव को अपनी ही धमनियों में दौड़ते खून की आवाज़ सुनाई दे रही थी। घड़ी की सुइयां एक-दूसरे पर रेंग रही थीं। कमरे की खिड़की से आती चाँदनी दीवारों पर लंबी और टेढ़ी-मेढ़ी परछाइयाँ उकेर रही थी, जो किसी के हाथ की उंगलियों जैसी लग रही थीं।तभी— ठक... ठक... ठक...आरव का शरीर पत्थर का हो गया। आवाज़ दरवाज़े से नहीं, बल्कि ...Read More