आ...... गया है......👻🖤
काल गढ़ की तारा - 3 : दर्पण में तीसरी औरत👻🖤
चेतावनी: कमजोर दिल वाले इस कहानी से दूर रहें! ये कहानी रात में अकेले न पढ़ें।
शादी की पहली रस्म... और महल के शाही कक्ष में लगा 100 साल पुराना विशाल, श्रापित दर्पण... एक डरावनी चीख के साथ 100 टुकड़ों में बिखर गया!
भूषण सिंह का माथा ठनका, उन्होंने तुरंत बात दबा दी। दासियों से कहलवा दिया - "कह दो, बिल्ली ने तोड़ दिया।"
पर तारा जानती थी... उसने अपनी आँखों से देखा था... टूटने से ठीक एक पल पहले उस दर्पण में दो नहीं, तीन औरतें थीं!
तीसरी औरत... जिसके लंबे काले बाल चेहरे को ढके थे, जिसकी सफेद साड़ी खून से सनी थी, और जो मुस्कुरा कर सीधा तारा को ही देख रही थी!
अब वो हर रात लौटती है। हर टूटे हुए कांच के टुकड़े में। हर परछाई में।
वो दर्पण से बाहर आना चाहती है... और उसे चाहिए... तारा का शरीर!
आ गया है काल गढ़ की तारा का सबसे डरावना EPISODE 3 - क्या आपमें है इसे अंत तक पढ़ने की हिम्मत?
क्या है इस दर्पण का 100 साल पुराना काला राज...
आगे के लिए 🔥 follow💗🖤
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