शिक्षक दिवस पर कविता
गुरु वो जो सन्मार्ग दिखाए
सिर्फ सिलेबस ही न पूरा कराए
छात्र का सर्वांगीण विकास कराए
देशप्रेम, और नैतिकता सिखाए
मन की सारी गांठे खोले
कानों में मिश्री सी घोले
करे चरित्र निर्माण, मानवता सिखाए
जिसके सानिध्य में आकर
मन गंगा सा निर्मल हो जाए
शिष्य बिना संकोच मन की बात कह पाए
करे हमेशा प्रोत्साहित और हौसला बढ़ाए
ऐसे गुरु अगर मिल जाए
जीवन अपना धन्य हो जाए
ऐसी गुरु-शिष्य परंपरा कहाँ से लाए
गुरु भक्त अरुणि, एकलव्य याद आएं
ना वो गुरु रहे, ना वो शिष्य
बेशर्मी की हद तो देखो
शिष्य आज का गुरु को आंख दिखाए
जब सम्मान ही नहीं गुरु का मन में
तो ऐसे बच्चे ज्ञान कहाँ से पाए
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली