एक ऐसा पर्व, जो हमें कृष्ण के समीप ले जाता है, जो हमें कृष्ण के जीवन से परिचित कराता है। आचार्य जी ने समझाया था कि जन्म सभी का बंधन और अँधेरे में ही होता है, जैसे कृष्ण का हुआ था। और उस बंधन और अँधेरे से भी जीवन की उत्कृष्टता और जो उच्चतम अवस्था है, उसे हासिल किया जा सकता है। उस संभावना को साकार करते हैं श्री कृष्ण और इसीलिए हम सब जन्माष्टमी मनाते हैं।
लेकिन जो पर्व जीवन के बंधनों और अँधेरों से प्रकाश और मुक्ति की तरफ़ ले जाने का प्रतीक है, उसी पर्व पर लाखों-करोड़ों लोग कृष्ण से दूर हो जाएँगे, क्योंकि उन तक कृष्ण की जो छवियाँ पहुँचाई जा रही हैं, जो कृष्ण के बारे में उन्हें ज्ञान दिया जा रहा है, वो विकृत और विषैला है।
आपकी संस्था लगातार गीता के माध्यम से कृष्ण के वास्तविक स्वरूप को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास कर रही है।
आचार्य जी ने कहा था कि आज का धर्मयुद्ध वास्तव में प्रचारयुद्ध है। आज का कुरुक्षेत्र प्रचार क्षेत्र है। जो प्रचार को जीत लेगा, वो तय करेगा कि धर्म जीतेगा या अधर्म।
आज हमें धर्म तो जीतता नहीं दिख रहा है, वरना पृथ्वी विनाश के कगार पर खड़ी नहीं होती, हर तरह से मानव इतना विकृत नहीं होता।
इस जन्माष्टमी पर लाखों लोगों के जीवन में कृष्ण पहुँच सकते हैं, हजारों लोग गीता सत्रों में जुड़ सकते हैं, अगर आप उसके लिए माध्यम बनें तो।
पिछले महीने संस्था को बेहद कम संसाधन मिले थे। इस महीने की शुरुआत कुछ खास नहीं है।
और जो श्री कृष्ण के नाम पर पाखंड-अंधविश्वास फैला रहे हैं, जो गीता को विकृत कर रहे हैं, वो हजारों करोड़ में खेल रहे हैं।
आज ज़रूरी है कि गीता के लिए, धर्म के लिए समर्पित होकर आगे आइए और इस जन्माष्टमी पर माध्यम बनिए सत्य को, कृष्ण को, गीता को जन-जन तक पहुँचाने का।
निर्मम होकर धर्म के लिए समर्पित होइए।