पास होने की क़दर
जब कोई हमारे पास होता है,
तो हम उसकी क़दर नहीं करते,
उसकी खामोशी को अनदेखा करते हैं,
उसकी मौजूदगी को आम समझ लेते हैं।
लेकिन जब वही शख़्स हमसे दूर चला जाता है,
तब उसकी हर बात याद आती है,
उसकी हर छोटी-सी कमी खलती है,
और हम उसकी यादों में ही डूबे रहते हैं।
शायद यही इंसान की सबसे बड़ी भूल है—
जो पास है, उसकी क़दर नहीं,
और जो दूर हो गया,
उसके बिना ज़िंदगी अधूरी लगती है।