याद आए तुम इतने वर्षों बाद,
दर्द हुआ बिछड़ने के बरसों बाद।
भूल चुके थे हम तुम्हें अरसों तक,
फिर आज क्यों मिले एहसासों तक।
वक़्त की धूल में दब गए थे जज़्बात,
खामोश हो गई थीं दिल की सारी बात।
सोचा था भूल गए हैं तुम्हें हम,
फिर क्यों याद आए तुम इतने बरसों बाद।
जिस रिश्ते को वक़्त ने पीछे छोड़ दिया,
दिल ने आज फिर उसे क्यों जोड़ दिया?
ना कोई शिकवा, ना कोई सवाल,
फिर क्यों तुम्हारी याद ने किया बेहाल।
शायद कुछ रिश्ते मिटते नहीं कभी,
बस खामोश हो जाते हैं ज़िंदगी में कहीं।
तुम दूर थे, फिर भी दिल के पास रहे,
हम भूलते रहे… और तुम याद आते रहे।