बेटी?....
माँ वह, जो किसी और के बच्चों को भी ममता दिखाती है।
फिर क्यों मैय्या, जिस संतान को तोहे जन्म दिया,
उनके साथ तुमने क्यों भेद-भाव किया?
मैंने भी तोरी कोख से जन्म लिया,
उसी की तरह वही दूध पीया,
फिर भी यह भेद-भाव क्यों, मैय्या?
क्यों हर बात मुझे ही समझना पड़ता है मैय्या?
वह भी तो तोरी बात को समझ जाए ना मैय्या।
अगर मैं बेटी हूँ तोरी, तो वह बेटा है तोरा,
क्यों मैं ही तोरी पीड़ा का भार अकेले ले चलूँ?
क्या मेरे नाम से जन्म लिए यह तोरे शब्दों ने—
'तोहे जैसी बिटिया किसी को ना मिले, करम फूटे थे मेरे जो मैंने तुझे जन्म दिया'
आखिर क्यों मैय्या? यह भेद-भाव क्यों?
उसका नाम छोड़ो, वह तो कहे ऐसा ही है।
मैय्या तो ममता के लिए जानी जाती है,
फिर यह भेद-भाव क्यों मैय्या?
उसके भाग्य में तू मैय्या है, तो मेरे भाग्य में क्यों नहीं?
अगर वह 'राजा बेटा' है तोरा,
तो मैं भी तो तोरी बेटी हूँ।
फिर यह भेद-भाव क्यों आया?
वह वारिस है, तो मैं क्यों 'पराया धन' कहलाऊँ मैय्या?
मैं भी तो तोरी बेटी हूँ,
तूने ही तो जना है मुझे, तूने ही दूध पिलाया मुझे,
फिर आखिर क्यों यह भेद-भाव मैय्या?
आखिर क्यों यह भेद-भाव मैय्या?