पुराने बटन-
नया शूट बनवाया,
महँगा चीर खरीदा,
कॉलर, आस्तीन,
फिटिंग और पुराने
बटन जोड़ी में टंकवाए।
स्मृतियों के पटल पर
कांच के इस बटन पर
दिए वचनों के साथ-साथ
छूते मचलता अहसास साथ।
उसके धीर का तोड़ कहाँ?
नए मकान में पुराने फाटक
जोड़े, अब वो रातरानी कहाँ?
नए वादों में पुराना फसाना,
समांतर सींचे प्रियतमा अब कहाँ?
उजड़ते पल भर में रिश्ते,
सालों संजोए महबूब न्यारे!
माथे के बल भूलते पहचाने,
मस्तिष्क पुष्पवान रोज़ पुकारे।
हवा ने सब कुछ बिगाड़ डाला,
देवता का पुष्प मुझ आ बरसा।
संभवतः उसने पुकारा बुलाया,
कोई मेरे कानों में फुसफुसाया है।
हाँ, उसने मुझे दीदार पर बुलाया है।
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