मैं और मेरे अह्सास
सजा है माँ का दरबार
सजा है माँ का दरबार आओ भक्ति के रंग में
जाए l
हर्षोल्लास की लहर चारो ओर मन प्रफुल्लित पाए ll
भक्त जन पूर्ण रूप से भक्ति के रंग में रंगीन हो कर l
सजता दरबार बेहद शुभ देवी का सदा रहता साए ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह