।। युवा हूँ, युवा मैं ।।
दिल और दिमाग
का नया रंग हूँ,
झूमता फिरता
मैं मस्तमलंग हूँ।
गिरता हूँ, संभलता हूँ,
अनंत क्षितिज को
पार करता हूँ।
अनंत चाह, अनंत राह का
एकतारा हूँ।
माटी का कण हूँ,
पूर्वजों का मन हूँ,
माता-पिता का
आशीष-वचन हूँ।
समाज का मान हूँ,
त्याग का प्राण हूँ,
राष्ट्र और विश्व के
नव-उत्थान की पहचान हूँ।।
- Anant Dhish Aman