#राधा कृष्ण संवाद 🥀
एक दिन कृष्ण ने राधा से पूछा....
" राधे, बताओ तुम्हारे लिए प्रेम क्या है....???
राधा ने भी मुस्कुराकर बड़ी सरलता से जवाब दिया।"दो दिलों का मिलना, दो रूहों का जुड़ना यहीं प्रेम हैं।"
इस बात पर कृष्ण मुस्कुरा दिए और बोले.....
"बस यहीं प्रेम की परभाषा हैं तुम्हारे लिए,
अगर दो दिलों का मिलना प्रेम हैं तो फिर कोई एकतरफा प्रेम करे, क्या वो प्रेम नहीं है....??? प्रेम तो तब भी प्रेम ही रहेगा, प्रेम तो प्रेम हैं वहां दिलों का मिलना या रूहों का जुड़ना मायने नहीं रखता।
"….... प्रेम तो मां के मातृत्व में भी हैं जो अपने बच्चे को नव महिने अपने पेट में रखती हैं वो दर्द पीड़ा सहती है, उस असहनीय प्रसंव पीड़ा को सहन करने के बाद भी जब वो अपने हाथों में अपने नवजात शिशु को लेती हैं तब उसके चेहरे पर दिखने वाले उस भाव को, उसके दिल में जागने वाले उस एहसास को प्रेम कहते हैं।
.....प्रेम वो हैं जो पिता पुरा दिन मेहनत कर के अपने परिवार के लिए कुछ खुशियां कमा कर लाता है और अपने बच्चों के चेहरे पर दिखने वाली उस खुशी को देख कर उसके मन को सुकून मिलता है वो प्रेम हैं।
.....प्रेम इस प्रकृति में हैं, इन बहती हुई नदियों में हैं झरनों में हैं.... प्रेम हर उस वस्तु में हैं जो हमें खुशियां देती हैं, प्रेम हर उस रिश्ते में है जो हमसे जुड़ा है....इस खिलती हुई कलियों में हैं जो बीना किसी स्वार्थ के सभी को खुशियां देती है जीवन देती है यह है प्रेम....
प्रेम की कोई सीमित परिभाषा नहीं है, प्रेम अथाह हैं, अविरल हैं अनंत है...अदभुत है। इसे कहां दो दिलों में सीमित कर पाओगी तुम....!!!"
कृष्ण के इस बात पर राधा ने भी कृष्ण के कांधे पर सर रख के और उनका हाथ अपने हाथ में लेकर बड़ी सरलता से फिर से जवाब दिया....
"प्रेम की परिभाषा क्या है यह मैं नहीं जानती, मेरे लिए तो प्रेम सिर्फ़ तुम हों, तुम्हारा ये साथ हैं जब तक तुम मेरे साथ हों मेरे लिए सारी दुनियां प्यारी है जिस दिन तुम मुझसे दूर हो जाओगे तब ना ये प्रेम रहेगा और ना मैं, तो मेरे लिए प्रेम का मतलब सिर्फ कृष्ण और कृष्ण मतलब ही प्रेम हैं....!!!"
जय श्री कृष्ण 🙏🌹