तुम्हारी छबि एक दम धुंधली हो गई है... एक दम अपरिचित , मेरे सिरहाने जब तुम्हारी छबि दिखती तो एकाएक में भय से सहम जाती...मेरी देह ठंडी हो जाती , और उस अवस्था में, मैं तुम्हे साफ देखने की कोशिश करती....
तुम मुझे दिखते... एकदम स्पष्ट पर वह चेहरा प्रेम का नहीं, बल्कि एक अंतहीन तृष्णा .....में डूबा हुआ होता है। तुम्हारी आँखों में वह चमक नहीं, बल्कि एक भयावह रिक्तता ....होती है, जो मुझे भीतर तक सुन्न कर देती है।"
@shivaninany