Hindi Quote in Poem by Rajeev Namdeo Rana lidhori

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बुंदेली दोहा प्रतियोगिता-266
दिनांक-2.5.26-प्रदत्त शब्द-नरौ (परसौ)
संयोजक-राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़

प्राप्त प्रविष्ठियां-
1
जीवन सबरौ कड गऔ,परो नरों में आज।
राम भजन ना कर सके,आरइ है अब लाज।।
-रामानंद पाठक'नंद' नैगुवां
2
नरौं बरे लंका सुनो,लुअर देय लंगूर ।
त्रिजटा ने सपनो कहौ,पूरौ हुयै जरूर।।
-प्रमोद मिश्रा बल्देवगढ़
3
दै खालें रुपया नरों,रोज-रोज टरकात।
भग जातइ घर छोड़ कें,जब हम माँगन जात।।
-अंजनी कुमार चतुर्वेदी निबाड़ी
4
काल कभउँ नइँ आत है,करत नरौ की बात।
भ्यानें देखे ‌भुन्सरा,कीखों ‌है सौगात।।
-सुभाष सिंघई ,जतारा

5 (तृतीय स्थान प्राप्त दोहा)
परों नरों के फेर में,ना परियो जजमान।
आज करै जो काम सब,बन जैहै भगवान।।
-अमिताभ गोस्वामी,भोपाल
6
नरौ दिवाई दोज है,दिया मगा लो आज।
तैयारी ऐसी करौ,समर जाय सब काज।।
-सियाराम अहिरवार,टीकमगढ़
7
भलौ करौगे आज तो,काल खिलेगो फूल।
परसौं तो खुशियाँ मिलें,नरसौ रहै न शूल।।
-प्रो शरद नारायण खरे,मंडला
8
जीवन के हैं चार पन,नरौ तलक की देह।
मोह करे कछु हो नहीं,लगा प्रभू सैं नेह।।
-प्रदीप खरे 'मंजुल' टीकमगढ़
9
भूलत नइयां ऐ सखी, नरौं रात की बात।
सपनन आये श्याम जू,हँस हँस पकरें हात।।
-आशा रिछारिया(निवाड़ी)
10
जानें हैं कल देखबे,मोखों अपने हार।
परसों कौ कछु नइं पतौ,नरौं तलैया पार।।
- वीरेन्द्र चंसौरिया टीकमगढ़
11
लगे मनाबे राम जू, लगो नरौ से ध्यान।
विनय न मानी मूढ़ ने, तब तानो तो बान।।
-विशाल कड़ा मांझी,बडोराघाट

12 (प्रथम स्थान प्राप्त दोहा)
जो होंनें हो कें रनें, करौ न झूटी आस।
परौं नरौं की का खबर,पल कौ ना बिस्वास।।
-डॉ.देवदत्त द्विवेदी,बड़ामलहरा

13
परों नरौं जो करत नर,मन नइ लगवे काम ।
काज विगारत खुदइ को,उनकी सडवे चाम।।
*-डॉ.आर.बी पटेल,छतरपुर
14
जाव न घूमन हो जितै,जीवन नै महफूज।
परौं-नरौं ही डूब गव,बरगी में इक क्रूज।।
-अमर सिंह राय, नौगांव

15 (द्वितीय स्थान प्राप्त दोहा)
परौं नरौं तुम जिन करौ, कर डारौ ततकाल।
औसर चूकैं कब भलो,होत हाल बेहाल।।
* -श्यामराव धर्मपुरीकर,गंजबासौदा

16
आज मरे कल दूसरो,परों तीसरो होय।
नरों होय चौथो दिनाँ, फिर नइँ पूँछै कोय।।
*-तरुणा खरे'तनु',जबलपुर में
17
नरो करम से जानियत, जाति कहे का होय
भलो कर सो भलो कऔ,बुरो करै सो खोय।
* -भावना शर्मा,सागर
© संयोजक- राजीव नामदेव 'राना लिधौरी

Hindi Poem by Rajeev Namdeo Rana lidhori : 112023884
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गांव की ज़िंदगी – सुकून का असली घर
गांव की ज़िंदगी – सुकून का असली घर

सुबह की पहली किरण जैसे ही खेतों पर पड़ती, पूरा गांव सुनहरी रोशनी से जगमगा उठता। पक्षियों की मधुर चहचहाहट, मंदिर की घंटियों की आवाज़ और ठंडी हवा मन को एक अलग ही शांति देती थी।

शहर में रहने वाली अनन्या कई साल बाद अपने दादा-दादी के गांव आई थी। शहर की भागदौड़, ट्रैफिक और मोबाइल की दुनिया में वह खुद को थका हुआ महसूस करती थी। गांव पहुंचते ही उसने देखा—हर चेहरे पर मुस्कान थी, हर घर का दरवाज़ा खुला था और हर इंसान एक-दूसरे का हाल पूछ रहा था।

एक सुबह दादाजी उसे खेतों में ले गए। हरी-भरी फसलें हवा के साथ झूम रही थीं। किसान मेहनत कर रहे थे, लेकिन उनके चेहरों पर संतोष साफ दिखाई दे रहा था।

अनन्या ने पूछा, "दादाजी, यहां लोगों के पास शहर जैसी सुविधाएं तो नहीं हैं, फिर भी ये इतने खुश कैसे हैं?"

दादाजी मुस्कुराए और बोले, "बेटी, खुशी बड़ी-बड़ी इमारतों में नहीं, बल्कि संतोष, अपनापन और प्रकृति के साथ जीने में होती है।"

उस दिन अनन्या ने बच्चों के साथ मिट्टी में खेला, पेड़ों की छांव में बैठकर कहानियां सुनीं, तालाब किनारे सूर्यास्त देखा और रात को खुले आसमान में अनगिनत तारों को निहारा।

जब वापस शहर लौटने का समय आया, तो उसके दिल में एक नई सोच जन्म ले चुकी थी। उसने समझ लिया कि जीवन का असली सुख केवल पैसा कमाने में नहीं, बल्कि अपनों के साथ बिताए गए पलों और प्रकृति के करीब रहने में है।

उसने तय किया कि चाहे वह शहर में रहे, लेकिन गांव की सादगी, प्रेम और शांति को हमेशा अपने जीवन का हिस्सा बनाए रखेगी।

सीख:
"सच्ची खुशी वहीं मिलती है, जहां मन को शांति, रिश्तों में अपनापन और प्रकृति का साथ मिलता है। गांव की सादगी ही जीवन की सबसे बड़ी दौलत है।" 🌿🌾

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