तेरे ही एहसास में जलकर भी देख लिया,
*खुद को तेरे नाम से ढलकर भी देख लिया।*
एक तेरे होने का भरम था दिल के अंदर,
*उस भरम को सच समझकर भी देख लिया।*
माँगी थी मोहब्बत हमने झुक-झुक कर बहुत,
*आँखों से अपनी अश्क बहाकर भी देख लिया।*
कोई नहीं सुनता यहाँ टूटे दिल की सदा,
*हमने हर दर पे जाकर भी देख लिया।*
जिसको चाहा था जान से ज्यादा कभी,
*उसे अपना बनाकर भी देख लिया।*
फिर भी खाली ही रहा ये दिल का जहाँ,
*सब कुछ पाकर भी खोकर भी देख लिया।*