मैं पहली बार कह सकती हूं इनका काल्पनिक घटनाओं से कोई लेना देना नहीं है......
खोल क्यों नहीं देते न्याय देवी के आंखों से पटी
बचपन से सुना था वर्दी धारी करते अपनी हिफाजत
थाने की चौखट पर बिकता सच
ईमान बेच कर लोग करते मर्यादा की बाते
मैने देखा ऐसा सच जहां महिला पुलिस कर्मी कह रही "बुलाओ उस रंडी को"
एक मिनट किसने कानून के रखवालों को रंडी कहने का हक है दिया
उसी क्षण मेरे मन में आया क्या इन मैडम को पता है जिसको अपमानजनक शब्द से बुला रही है उसने सच में जुर्म किया है या नहीं अगर किया भी है तो उसके लिए न्यायलय बैठा है
हा मैं यहां भूल गई न्याय देवी के आंखों में पटी जो बंधी है....
मैने देखा ऐसा सच न्याय के द्वार पर खड़े होकर हाथ फैलाए हुए कह रहा एक नौजवान " मैने शादी करके गुनाह थोड़े कर दिया"
एक मिनट उसका गुनाह देखेगा कौन...
मैं फिर से भूल गई न्याय देवी की आंखों में पटी बंधी है।
मैने देखा ऐसा सच जहां जन्म मरण है चलता
भगवान का दूसरा रूप कहने वाले ने कि ऐसी बात " पहले पैसे जमा करवाओ फिर ही इलाज होगा"
एक मिनट रुको डॉक्टर साहब आप जिस अस्पताल में खड़े हो वहां की सरकार ने निःशुल्क इलाज है किया
मैं फिर भूल गई न्याय देवी की आंखों में पटी बंधी है।।
✍️ अंतिमा 😊