मुझे तुमसे गले मिलना है और बहुत देर तक मिलना है,
जहाँ साँसें एक-दूसरे में खो जाएँ जहाँ शब्द अपनी जरूरत खो दें
जहाँ सिर्फ धड़कनों की आवाज बचे और वक़्त भी थम कर बस देखे कि दो लोग कैसे एक दूसरे में घर पा लेते है।
मुझे तुमसे ऐसे मिलना है जैसे कोई थका हुआ परिंदा आखिरकार अपनी शाख ढूंढ ले और फिर उसे उड़ जाने की कोई जल्दी न है