शीर्षक "अधूरी बाते"
मैं तुम्हारे ख्यालों में खो गया,
न जाने सुबह से शाम कब हो गई।
जब भी मेरी पलकें झपकती थीं,
बस तुम्हारी होठों की मुस्कान दिखती थी।
मैं तुम्हारे लिए यही सोचता था,
कि तुम करीब आकर मुझे कब सीने से लगाओगी...
इन्हीं ख्यालों में खोया हुआ था मैं,
पर जब नींद से मेरी आँखें खुलीं,
तो आँखों में सिर्फ आँसू थे,
क्योंकि तुम मुझसे बहुत दूर थी।
पास थे तो बस तुम्हारे शब्द,
जो मेरे दिल के करीब थे।
— एसटीडी मौर्य✍️
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