कला में चेहरों की सुंदरता नहीं,
आत्मा की छाप मायने रखती है।
कला वो है
जो हाथों की रेखाओं से निकलकर
समय पर अपनी कहानी लिखती है।
कला वो है
जो नयनों की खामोशी में छिपकर
अनकहे भावों को जन्म देती है।
कला वो है
जो चलती हुई हवा बनकर
रूह को छू जाती है
बिना दिखाई दिए।
कला को किसी माप,
किसी सीमा,
किसी परिभाषा में कैद नहीं किया जा सकता,
क्योंकि एक समय के बाद
ज़िंदगी खुद
कला की सबसे गहरी अभिव्यक्ति बन जाती है। ....ARTI MEENA