मैं लोगों से मुलाकातों के लम्हें याद रखता हूं
मैं बातें भूल भी जाऊं तो लहज़े याद रखता हूं
सर-ए-महफ़िल निगाहें मुझ पे जिन लोगों की पड़ती हैं
निगाहों के हवाले से वो चेहरे याद रखता हूं
ज़रा सा हट के चलता हूं ज़माने की रवायतों से
जिन पे बोझ मैं डालूं वो कंधे याद रखता हूं
दोस्ती जिससे कि उसे निभाऊंगा जी जान से
मैं दोस्ती के हवाले से रिश्ते-नाते याद रखता हूं