अंतर्मन में बैठा रावण, बस उसका करें विनाश।
हृदय में ज्यों राम बसेंगे, त्यों रावण का हो नाश।
. . . . 'दशानन रावण' के संहार की कहानी एक उदहारण है इस बात का;
कि अहंकार कुशाग्र से कुशाग्र बुद्धि का भी विनाश कर देता है, और अन्याय कितना भी प्रबल क्यों न हो; उसका अंत निश्चित है।
सदियों से बुराई पर अच्छाई के विजय का जो त्यौहार हम मनाते आ रहे हैं, उसी पारंपरिक 'विजय दशमी' की सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।।
. . . वीर। 🪷🪷