मुझे ये सफर कहा ले जाएगा
मुझे इसकी खबर नहीं
शायद कोई मुझे दोस्त मानता हो
मुझे इसकी ख़बर नहीं
झूठ से रिश्ते तोड़ दिये मेने
सच के साथ चलता हु अब पर किसी को ख़बर नहीं
भीड़ में खो जाता था पहले
अब एकांत क्यों चाहता हु ख़बर नहीं
जिंदगी इतनी शिद्दत
से चुका हु अब
क्या रह गया जिंदगी में
मुझे इसकी खबर नहीं
कोई मुर्दा भी गुजर जाता है सामने से
पर जैसे मौत के दर्द का भी असर नहीं
झूठे चेहरों पर हंसी आती हैं अब
क्यों करते लोग इश्क झूठ से
इसकी मुझे खबर नहीं