रास्ते हर मोड़ पर पथरीले मिले,
ज़िंदगी के इम्तिहान में फासले मिले।
मंज़िल ने कभी मुड़कर देखा ही नहीं,
हर मोड़ पर बस काँटे ही खिले।
ना कामयाबी का कोई ताज मिला,
ना वक़्त का ही कोई साज़ मिला।
फिर भी आँखों में वही एक ख़्वाब है,
कल ढला है तो क्या, फिर नया आज है।
पाँव थके हैं, पर हौसला थमा नहीं,
उम्मीद का ये दीया कभी बुझा नहीं।
जब तक साँसों में थोड़ी भी रवानी है,
जीतकर लिखूँगा, अभी अधूरी कहानी है।