"मेरी परछाईं से गुफ़्तगू"
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"जब कोई इंसान बाहर के शोर से थक जाता है, तो अपनी ही परछाईं के पास बैठकर खुद को सुनना ही सबसे बड़ा मरहम बन जाता है।"
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मुझे बातें करने का बड़ा शौक है,
मुझे हंस के जीने का बड़ा शौक है!
मुझे पसंद है मेरा मुझसे मिलना, तो मैं मिल लेती हूँ,
मुझे रोना नहीं आता, तो मैं हंस लेती हूँ!
कहती है दुनिया— "तू अजीब है बहुत",
और मैं इन अजीबोगरीब बातों में भी खुश रह लेती हूँ!
मुझे समझ नहीं आता मैं कौन सी दुनिया में हूँ,
मैं कैसे हूँ, मैं क्यों हूँ...
मैं जीती हूँ या मरती हूँ!
मैं जैसी भी हूँ, मुझे समझ नहीं आता मैं कैसी हूँ?
लेकिन मैं खुद को समझने की पूरी कोशिश करती हु।
मुझे समझना है खुद को, मुझे जानना है खुद को,
मुझे बहुत शिकायतें हैं खुद से, मुझे बताना है खुद को...
मुझे मालूम नहीं मैं कैसे बताऊँ?
और उस कशमकश, उस उलझन में चलते हुए...
मैं अपनी ही परछाईं से बाते कर लेती हूँ!
मेरी परछाईं समझती है मुझे, एक सहारा देती है,
वह बिठाकर पास अपने, मेरी सब बातें सुन लेती है।
वह नहीं कहती मुझसे कि— "तू चली जा यहाँ से, मुझे कुछ समझ नहीं आता तेरा"
वह मेरी हर एक बात को बड़ी गौर से सुनती है,
और सुनने के बाद... वह खामोशी से मेरे साथ चलती है!
मेरी परछाईं से अकेले में की गई गुफ़्तगू ही मुझे शांत करती है।
मुझे उम्मीदों के भंवर में फंसने का शौक नहीं,
पर फिर भी मैं खुद से उम्मीदें लगाई हूँ...
मुझे समझ नहीं आता मैं कैसी हूँ,
यही जानने के लिए मैं खुद के पीछे खुद ही को लाई हूँ!
मेरी परछाईं बड़ी शांत है,
वह मुझसे ज़्यादा बातें नहीं करती...
वह बैठती है जब भी पास मेरे,
वह बस हर एक बात मेरी सुनती है!
मेरा भी जी चाहता है कभी कि वह कहे अपनी,
पर वह बस खामोश होकर सुनती है...
मैं कहती हूँ— "तुम भी कहो कुछ"
तो बस सुनते-सुनते एक बात ही कहती है:
"तू कह ले जो तुझे कहना है,
तेरे मन की बात ही मेरे अंदर की बातों में रहती है!
जब-जब तू मुझसे बातें करती है,
वह सब बातें मेरी ही रहती हैं...
मैं बोल नहीं सकती दुनिया के आगे, कह नहीं सकती,
इसीलिए तेरे ज़रिए ही अपनी बातें तुझसे कहती हूँ!
तुझे लगता है कि तू मुझसे बातें करती है...
अरे पगली, मैं तो तेरे ज़रिए अपनी ही कहती हूँ!
तू सुंदर है बहुत...
खूबसूरती तेरे चेहरे से ज़्यादा अंदर दिखती है,
खूबसूरती तेरे लफ़्ज़ों में छलकती है!"
इस कदर मेरी परछाईं,
अंधेरे में रहकर भी रोशनी की चमक बनती है!
अंधेरे में की गई मेरी परछाईं से गुफ़्तगू,
मुझे खुद से मिलाने में हर बार कामयाब बनती है!
मेरी ज़िंदगी के सफ़र में,
एक यही है जो मुझे खामोशी के साथ समझती है...!!!