Hindi Quote in Poem by Chandni

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एकांत क्यों?

जीवन हमारा एकांत क्यों हो गया,
क्यों इतना सन्नाटा छा गया?
सब कुछ पहले जैसा ही तो है यहाँ,
फिर क्यों जीवन तन्हा-सा हो गया?

लगता है जैसे इस एकांत से,
कभी बाहर आ पाएँगे या नहीं।
सपने हैं मेरे, कुछ करना है मुझे,
फिर क्यों बढ़ते कदम रुक जाते हैं यहीं?

यह एकांत आखिर है क्या,
जो बिन कहे चला आता है?
सरल-से जीवन को भी,
न जाने क्यों मुश्किल बना जाता है।

मन में सपने अब भी हैं मेरे,
कुछ पाने की चाह भी बाकी है।
फिर क्यों इस शांत जीवन में,
एक अनजानी-सी उदासी छाई है?

जीवन से आखिर क्या चाहूँ मैं,
किससे अपने मन की बात कहूँ?
जब खुद ही समझ नहीं पाती खुद को,
तो अपने सवालों के जवाब कहाँ ढूँढ़ूँ?

आख़िर यह एकांत है क्या,
जो मुझे मुझसे ही दूर कर गया?
जीवन तो वही है, सपने भी वही,
फिर मेरा जीवन बदल क्यों गया?

Hindi Poem by Chandni : 112039282
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