तुम आओगे तब शायद बहुत देर हो चुकी होगी,
पर मन में कोई कड़वाहट या शिकवा नहीं होगा।
जो आँसू बहे थे कभी तुम्हारी याद में,
वे सूखकर अब एक शांत किनारा बन चुके होंगे।
मैं तुम्हें याद रखूँगी सिर्फ़ एक दुआ की तरह,
गुज़रे हुए किसी मौसम की मंद हवा की तरह।
हृदय ने चाहा था तुम्हें जिस सादगी से,
वह प्रेम तो रहेगा, पर मैं बहुत दूर निकल चुकी होऊँगी।
जानती हूँ, दुनिया की भीड़ से जब थक जाओगे,
तो सुकून की तलाश में मुझे खोजते हुए आओगे।
मगर तब तलक इतनी देर हो चुकी होगी,
कि मेरा पता,
मेरी दुनिया और मेरा अक्स तक बदल चुका होगा।