मृत्यु - जीवन का अंतिम सत्य 🥀
मृत्यु अटल है, यही सृष्टि का विधान है,
जीवन क्षणभंगुर है, यही प्रकृति का ज्ञान है।
जो आज खड़ा है, कल उसका भी प्रस्थान होगा,
समय के इस चक्र में हर जीवन का अवसान होगा॥
किस बात का अभिमान, किस बात का मान है,
मिट्टी से जन्मे हैं, मिट्टी में ही स्थान है।
धन-दौलत, वैभव, यश यहीं रह जाएँगे,
कर्मों के चिह्न ही अंततः याद आएँगे॥
कोई राजमहल में, कोई कुटिया में सोता है,
मृत्यु के सम्मुख हर भेद विलीन होता है।
न ऊँच-नीच रहती है, न पद का अभिमान,
काल के सम्मुख झुकता है हर एक इंसान॥
पर मृत्यु केवल अंत नहीं, जीवन का बोध भी है,
ढलते हुए सूरज में नए सवेरे की खोज भी है।
जो समय मिला है, उसे व्यर्थ न जाने देना,
किसी के नयनों में अपने कारण अश्रु न आने देना॥
जब अंतिम बेला में जीवन का दीप बुझ जाएगा,
यह तन पंचतत्त्व में फिर विलीन हो जाएगा।
तब नाम नहीं, सत्कर्म ही पहचान बनेंगे,
हमारे किए उपकार किसी के प्राण बनेंगे॥
इसलिए जीवन को केवल बिताना नहीं,
हर श्वास को व्यर्थ गँवाना नहीं।
मृत्यु निश्चित है, यह सत्य स्वीकार करना,
पर उससे पहले जीवन से सच्चा प्रेम करना॥🫴🏻🍃
~ Adya