शाम ने बनारस लिखा…🪷🌊
कुछ शामें बनारस के नाम कर दूँ,
कुछ क़िस्से गंगा के नाम कर दूँ,
जो बातें कभी तुमसे कह न सकी,
सोचती हूँ उन्हें घाटों के नाम कर दूँ।
यहाँ वक़्त भी चलता है ज़रा धीरे-धीरे,
कुछ ख़्वाब उतरते हैं आँखों से धीरे-धीरे,
कोई मिलता है तो लगता है अपना है बरसों से,
कोई बिछड़ता है तो रहता है दिल में उम्रों से।
इन गलियों में कुछ अधूरे फ़साने रहते हैं,
कुछ भूले हुए चेहरे, कुछ पुराने ज़माने रहते हैं,
यहाँ हर मोड़ पर एक मुलाक़ात ठहर जाती है,
और हर विदाई एक याद बनकर रह जाती है।
गंगा की लहरों से पूछूँ, क्या-क्या बहाकर लाई हो?
कितने टूटे दिलों की ख़ामोशी अपने साथ छिपाई हो?
कितने लोग आए होंगे यहाँ ख़ुद को भुलाने,
और कितने लौटे होंगे किसी की यादें साथ ले जाने।
अजीब शहर है ये, यहाँ बिछड़कर भी लोग मिलते हैं,
ख़ामोशियों के बीच भी कुछ अनकहे क़िस्से खिलते हैं,
यहाँ मोहब्बत का होना ज़रूरी नहीं किसी को याद करने के लिए,
कभी एक मुलाक़ात ही काफ़ी होती है उम्र भर इंतज़ार करने के लिए।
और जब कभी ज़िंदगी से थककर लौटूँगी मैं,
इन घाटों की सीढ़ियों पर कुछ पल ठहरूँगी मैं,
न कोई सवाल होगा, न जवाब की तलाश होगी,
बस गंगा बहती रहेगी… और दिल में बनारस की प्यास होगी।
क्योंकि कुछ शहर पीछे छूटकर भी पीछे नहीं छूटते,
कुछ लोग दूर होकर भी दिल से कभी नहीं रूठते,
और कुछ मुलाक़ातें मुकम्मल होकर भी अधूरी रह जाती हैं,
जैसे बनारस की शामें - जो ढलकर भी याद आती हैं।✨
for the stories that stay long after the last page....
♡ inspired by October Junction!!
~ Adya...