आस्था या दिखावा?🌺🪷
नौ दिनों तक मंडपों में, नौ रूपों को पूजते हैं,
वही लोग सड़कों पर, बेटियों को नज़रों से चीरते हैं।
स्टेटस पर देवी की आराधना का शोर होता है,
पर हकीकत में हर कदम पर विश्वास कमज़ोर होता है।
पत्थरों में माँ को खोजें, मगर दिल में मैल रखते हैं,
फिर किस मुँह से ऐसे लोग, माँ से आशीष माँगते हैं?
माँ सब जानती है, हर नीयत का हिसाब रखती है,
वो भक्ति नहीं, इंसान के कर्मों का लेखा रखती है।
~अनामिका✍️