अजनबी
वक़्त गुज़रता गया,
लोग बदलते गए,
जो कभी अपने-से लगते थे,
उन्हें भी वक़्त ने बदल दिया।
अब अपनापन कैसे जताएँ उनसे,
जो अब बदले-बदले से हो गए हैं?
क्या ही कहें अब उनसे,
जब कहने को कोई लफ़्ज़ नहीं रहे।
जो कभी अपने हुआ करते थे,
आज अजनबी-से हो गए हैं,
वक़्त के साथ न जाने क्यों,
हमारे रिश्ते भी बदल गए हैं।