परिणीता फिल्म का पीयू बोले गाने का वह जो एक अनरिलीज्ड मुखड़ा अंतरा या फिर लाइन जो भी कह लो उसे जो अभी कुछ टाइम पहले इंस्टाग्राम पर बहुत फेमस हुआ था_ एक नदी थी जो कभी भी सागर से मिल ना सकी, रास्ते के पर्वतों को पार कर ना सकी ,
मुझे लगता है इस लाइन में एक सीख छुपी हुई है।
कि किसी की भी जिंदगी कभी हर तरह से पूरी नहीं होती कुछ ना कुछ अधूरापन सबके साथ होता है
हां होते हैं कुछ लोग किस्मत वाले जिन्हें शायद दुनिया की सारी खुशियां मिलती है पर ऐसी किस्मत हर किसी के पास नहीं होती किसी को पूरी जिंदगी हर खुशी के लिए तरसना पड़ता है किसी की जिंदगी बाहर से देखने में तो पूरी होती है पर अंदर से अधूरी ही रह जाती है
बिल्कुल इस गाने की लाइन में बताई गई नदी की ही तरह जो दूसरों के देखने के लिए तो भरी पूरी है लेकिन उसके अंदर कितना अधूरापन है यह किसी को नहीं पता शायद जिंदगी भी कुछ ऐसे ही होती है
किसकी जिंदगी में क्या अधूरापन है यह आखिर उस इंसान का मन ही बेहतर जानता है दूसरे तो बस अंदाज़ा ही लगा सकते हैं और सच बात यह है कि हमारे किसी भी अंदाज़ा लगाने से किसी के असली दुख का पता चल पाना बहुत मुश्किल है