बेताबी...
इस कदर बेताब था तुम्हें पाने के लिए,
हर संभव कोशिश करता था तुम्हें रिझाने के लिए,
सुबह-शाम दूर से ही तुम्हारा दीदार करता था,
शायद तुम भी देखा करती अपना दिल बहलाने के लिए,
हर समय बस तुम्हें ही सोचा करता, पर चुप रहता जमाने के लिए,
एक दिन आखिर सब्र टूट गया,
क्योंकि मुश्किल हो गया मुझे दीवाने के लिए,
आखिर मुश्किल से वो दिन आ ही गया,
मैं रास्ते में आ गया बहाने से तुम्हें समझाने के लिए,
लेकिन तुम्हारे इन्कार से मैं टूट गया,
और तुम्हें दिल में दफना दिया एक अफसाने के लिए।