आज का सवेरा फिर निकला है,
अंधेरों को चीर कर उजाला निकला है।
फिर कहानी में रंग आएगा,
जो अधूरा था, वो अफ़साना पूरा होगा।
फिर मेहनत की कश्ती तैरेगी,
लहरों से लड़कर किनारा पाएगी।
फिर हम मुकम्मल शाम देखेंगे,
जहाँ सिर्फ तुम और हम होंगे,
और फिर एक नया सूरज उगेगा,
जो सिर्फ हमारे नाम का होगा।