खुद में खुश रहना
आज हम इतनी दूर आ गए हैं
उन छोटी-छोटी बातों से,
कि किसी की कही बात
अब हमें बुरा नहीं लगती।
किसने क्या कहा,
क्यों कहा,
किसके बारे में कहा
अब इन बातों से
हमें कोई फ़र्क नहीं पड़ता।
जब हम अपने बाल्यकाल के बारे में सोचते हैं,
तो एक मुस्कुराहट आ जाती है।
छोटी-छोटी बातें भी
जब हमें बुरी लगती थीं,
अब वही बातें
अच्छी लगती हैं।
उसने मेरे साथ ऐसा क्यों किया?
वह मेरी दोस्त होकर भी
मेरा मज़ाक क्यों बनाती है?
हम ऐसे क्यों हैं?
हम सबसे अलग क्यों हैं?
हम सर्वश्रेष्ठ क्यों नहीं हैं?
तब हम नासमझ थे।
हमारे भीतर इतनी समझ नहीं थी
कि जिन बातों को समझना चाहते थे,
उन्हें समझ पाते।
जैसे-जैसे समय बीतता गया,
बाल्यावस्था से किशोरावस्था
और फिर जीवन की आगे की राह पर बढ़े,
तो महसूस हुआ—
वह सब भी
जीवन का एक पाठ था।
हम खुद से ही पूछते थे
मैं कौन हूँ?
और धीरे-धीरे
जवाब भी मिलने लगा।
हमारी सोच,
हमारी भावनाएँ
और हमारे अनुभव
हमें बताने लगे
कि हम कौन हैं।
पहले हम दुखी होते थे
मैं ही क्यों?
मेरे साथ ही ऐसा क्यों?
मैं हर चीज़ में अच्छी क्यों नहीं हूँ?
अब बहुत कुछ समझ आने लगा है।
ज़रूरी नहीं
कि हम हर चीज़ में अच्छे हों।
छोटी-छोटी खुशियाँ भी
अब हमें खुश कर देती हैं।
अब हम खुद को
खुद ही स्वीकार करते हैं।
हमें किसी और की
मुहर की ज़रूरत नहीं
कि कोई हमें सर्वश्रेष्ठ बताए।
एक समय था
जब हम चाहते थे
कि सब हमें प्रेम करें,
हमारी तारीफ़ करें,
हमारे बारे में सोचें,
हमारे बारे में कुछ कहें।
हमें लगता था
कि सब कुछ
हमारे बारे में ही सोचा जाए
हम कितने अच्छे हैं,
हमारी तारीफ़ की जाए।
लेकिन अब बड़े होने पर
कुछ अलग-सा लगता है।
अब यह नहीं लगता
कि कोई हमारे बारे में क्या सोचता है।
अब बस इतना चाहते हैं
हम अपने आप में खुश रहें,
खुद को समझें,
खुद को स्वीकार करें,
और खुद से प्रेम करें।
और जब पीछे मुड़कर
अपने बीते जीवन को देखते हैं,
तो उन छोटी-छोटी बातों पर भी
एक हँसी आ जाती है।
सोचते हैं
हम उस समय कितने नादान थे,
क्यों थे,
क्यों उन बातों को
इतना बड़ा मान लिया था।
लेकिन शायद
वही तो जीवन का पाठ था।
जब हम वर्तमान में
किसी पल को जी रहे होते हैं,
तब उसका अर्थ नहीं समझ पाते।
समय बीतता है,
हम पीछे मुड़कर देखते हैं,
तो वही यादें
एक मुस्कान बन जाती हैं,
एक सीख बन जाती हैं,
और कभी-कभी
एक गहरा सुकून भी।
शायद इससे बड़ी बात और क्या होगी
कि इंसान दूसरों से
अपनी खुशी माँगना छोड़ दे
और खुद में ही
अपनी खुशी ढूँढ़ ले।