Hindi Quote in Poem by R N

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खास हु

मैंने कभी नहीं कहा कि खास हूँ

कुछ टूटे हुए लोगों की आस हूँ,
मैंने कभी नहीं कहा कि खास हूँ।

कुछ गिने-चुने लोगों का विश्वास हूँ,
मैंने कभी नहीं कहा कि खास हूँ।

वे ढूंढते हैं मुझे धूप में,
शायद मैं उनकी प्यास हूँ,
मैंने कभी नहीं कहा कि खास हूँ।

कुछ हँसते चेहरों की मिठास हूँ,
मैंने कभी नहीं कहा कि खास हूँ।

कुछ परिंदे दोस्त हैं मेरे,
शायद उनके लिए मैं आकाश हूँ,
मैंने कभी नहीं कहा कि खास हूँ।

जो दूर हैं मुझसे, याद करते हैं खुशी से,
शायद उनके लिए एक खूबसूरत एहसास हूँ,
मैंने कभी नहीं कहा कि खास हूँ।

मुझे क्या जानेगा कोई गहराई से,
मैं खुद में ही एक इतिहास हूँ,
मैंने कभी नहीं कहा कि खास हूँ।

जो जिंदगी के रण में लड़ रहे हैं अभी,
उनके लिए मैं एक अभ्यास हूँ,
मैंने कभी नहीं कहा कि खास हूँ।

जो लड़ रहे हैं अपने अंदर के अंधेरे से,
उनके लिए सुकून भरा प्रकाश हूँ,
मैंने कभी नहीं कहा कि खास हूँ।

जो हार के बैठ जाते हैं थक के,
उनके लिए मैं आखिरी प्रयास हूँ,
मैंने कभी नहीं कहा कि खास हूँ।

जो रोज़ देखते हैं झूठ के मुखौटे,
उनके लिए सच का लिबास हूँ,
मैंने कभी नहीं कहा कि खास हूँ।

जो ढूंढते हैं बाहर आशियाना,
उनके लिए हक का निवास हूँ,
मैंने कभी नहीं कहा कि खास हूँ।

और जो सच में मुझे जान गया है,
उसे खबर है कि मैं उसके पास हूँ,
मैंने कभी नहीं कहा कि खास हूँ।

Hindi Poem by R N : 112038712
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