एक बार एक बाज जुगनू के पीछे पड़ गया । उसे खाने के लिए पूरी ताक़त लगा दी । जुगनू ने ख़ुद को बचाने की काफ़ी कोशिश की लेकिन बाज के पंजों ने उसे जकड़ ही लिया ।
जुगनू सहम गया और बाज से पूछा- “मैं तो इतना छोटा - सा प्राणी हूँ जिसे खाकर तुम्हारा पेट ही नहीं भरेगा और ना हीं मैंने तुम्हारा कुछ बिगाड़ा है, फिर तुम मुझे क्यों खाना चाहते हो ?
बाज ने कहा - “ तुमने सही कहा । ना ही तुम्हें खाकर मेरा पेट भरेगा और ना ही तुमने मेरा कुछ बिगाड़ा है , बस ….. मुझसे तुम्हारी ये चमक नहीं देखी जाती । “
दोस्तो ! यही ज़िंदगी की सच्चाई है ।
उषा जरवाल ‘एक उन्मुक्त पंछी’