तारागण ने अवकाश समेटा प्राची में अरुणोदय हुआ है,
क्षितिज की शांत लहरों पर सूरज का नया उदय हुआ है,
फूलों पर औस की बूंदे मोतियों जैसे टपक रही है,
बागीचे में मंद लहराते समीर में ताज़गी महक रही है,
सोने की कलश लिए सूरज किरणों का द्वार बन खड़ा है,
सुनहरी सुई से अरुणिमा जैसे बादलों का श्रृंगार कर रही है,
नीले गगन की लालिमा ने जैसे कलियों का गुलदस्ता बिछाया है,
अंधेरे की स्याही से अपनी कलम को मैने नया रास्ता दिखाया है.........
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-Bhumitaba Rana