एक याद
देखा तुझे पहली बार,
वो दिन भी याद है
स्कूल का पहला दिन,
वो कक्षा आठ की बात है
बैठी थी तुम बैंच पर
दो लडकिया के साथ
और गुनगुना रही थी
अपनी सहेलियो के साथ
पास मे एक खिडकी
आ रही उस से हवा
लहरा रहे थे बाल
इसलिए चेहरा नही दिखा
कन्धे तक थे तेरे बाल
रंग था उनका सुनहरी
चमक रहे थे जैसे
आ रही हो सुनामी
मै भी बैठा एक बैन्च पर
मेरा कोई मित्र नही था
बस देख रहा था तुझे
मेरा कोई इरादा नही था
मै भी चाहता था
तुझ से बात करना
और नही कुछ बस
दोस्ती का हाथ बढाना
मेरी हिम्मत ना हुई
तुझसे बोलने की
किन्ही गलत ना समझे
इस बात की डर थी
:- लोधी अखीरा