✍️ *जिस दिन मैं लिखूंगा....*
भीड़ को *भ्रम* लिखूंगा,
एकांत को *सत्य* लिखूंगा।
दोस्ती को *फरेब* लिखूंगा,
प्रेम को *छल* लिखूंगा,
रिश्तों को *षड्यंत्र* लिखूंगा।
ज़िंदगी को *मौत* और
मौत को *सुकून* लिखूंगा।
फिर *तोड़* दूंगा अपनी कलम,
और खुद को *रिहा* लिखूंगा। 🥀🖋️
* *सभी एक लाइक अवश्य करें ❤️*