कमबख्त दिल…
कमबख्त दिल भी उसी पर आना था,
जो थी किसी और की, जानता जमाना था।
हम तो यूं ही दिल से उस पर मर बैठे,
ना जाने ये क्या गलती कर बैठे।
में तो उसका बहुत बड़ा दीवाना था,
क्या पता था कि यह एक महज तराना था।
एक दिन बयां कर दिया दिल का राज,
उन्होंने न जाने क्यों कर दिया एतराज।
उनका इस तरह घूर कर नजरे मिलाना था,
वो दिन वो पल और बन गया अफसाना था।